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ईरान का इतिहास: पहलवी वंश से इस्लामिक क्रांति तक

इस लेख में ईरान के इतिहास पर चर्चा की गई है, जिसमें पहलवी वंश का शासन, मोहम्मद रजा पहलवी द्वारा किए गए सुधार, और 1979 की इस्लामिक क्रांति की शुरुआत शामिल है। यह घटनाएँ न केवल ईरान के राजनीतिक परिदृश्य को बदलने में महत्वपूर्ण थीं, बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डालने वाली थीं। जानें कैसे एक अखबार की खबर ने ईरान में क्रांति की लहर पैदा की।
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ईरान का इतिहास: पहलवी वंश से इस्लामिक क्रांति तक

ईरान का ऐतिहासिक सफर

1925 में पहलवी वंश का शासन ईरान में शुरू हुआ, जिसका नेतृत्व रेजा शाह पहलवी ने किया। उन्होंने 16 वर्षों तक इस देश पर राज किया। 1935 में, रेजा शाह ने परशिया का नाम बदलकर ईरान रखा, क्योंकि स्थानीय लोग इसे पहले से ही ईरान के नाम से जानते थे। रेजा शाह के बाद उनके बेटे मोहम्मद रजा पहलवी ने शासन संभाला, और दोनों ने मिलकर लगभग 53 वर्षों तक ईरान पर राज किया। 1953 में, ईरान में एक नया युग शुरू हुआ, जब मोहम्मद रजा पहलवी ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई मोहम्मद मुसादिक सरकार का तख्तापलट किया। इस तख्तापलट में अमेरिका और ब्रिटेन की संलिप्तता की संभावना जताई गई थी, जो अब अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट द्वारा जारी दस्तावेजों से स्पष्ट हो गई है। इन दस्तावेजों में बताया गया है कि कैसे सीआईए ने ईरान में गुप्त ऑपरेशन के माध्यम से मुसादिक सरकार को गिराया। 1953 से 1977 तक, रेजा शाह ने अमेरिका की सहायता से शासन किया। 1960 के दशक में, उन्होंने वाइट रिवॉल्यूशन की शुरुआत की, जिसमें महिलाओं को वोट का अधिकार, बड़े जमींदारों से भूमि का वितरण और साक्षरता मिशन शामिल थे।


रेजा शाह पहलवी का गद्दी छोड़ने का कारण

रेजा शाह पहलवी को गद्दी क्यों छोड़नी पड़ी

1971 में, ईरान के शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने पारसी साम्राज्य की 2500वीं वर्षगांठ मनाने के लिए एक भव्य पार्टी का आयोजन किया। यह आयोजन प्राचीन शहर पर्सेपोलिस में हुआ, जो उस समय ईरान की ऐतिहासिक राजधानी थी। इस शाही भोज में 600 विशेष मेहमान शामिल हुए, जिनमें कई विदेशी राजघराने के सदस्य भी थे। इस पार्टी पर 10 करोड़ डॉलर खर्च किए गए, जो आज के हिसाब से लगभग 50 करोड़ डॉलर के बराबर है। जब ईरान के गरीब लोगों को इस खर्च का पता चला, तो उनके बीच गुस्सा भड़क उठा।


इस्लामिक क्रांति की शुरुआत

अखबार और दुनिया की सबसे बड़ी इस्लामिक क्रांति

ईरान में अमेरिकी सभ्यता के फलने-फूलने के साथ-साथ आम लोगों पर अत्याचार भी बढ़े। इस दौरान कई धार्मिक नेता शाह के खिलाफ हो गए। 6 जनवरी 1978 को एक अखबार में छपी खबर ने ईरान में एक बड़ी क्रांति की शुरुआत की। इस खबर में अयातुल्लाह खुमैनी को ब्रिटिश एजेंट बताया गया था। इसके बाद, लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश दिया, जिसमें कई लोग मारे गए। खुमैनी को गिरफ्तार किया गया, लेकिन बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।