ईरान का सख्त रुख: क्या अमेरिका के साथ बढ़ेगा तनाव?
ईरान की स्थिति में बदलाव
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान ने अपने रुख को और अधिक कठोर बना लिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बुधवार को स्पष्ट किया कि उनका देश लंबे समय तक संघर्ष के लिए तैयार है और अपनी सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तत्पर है। उन्होंने यह भी कहा कि यह टकराव छह महीने तक चल सकता है और ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
ट्रंप का युद्धविराम पर बयान
अराघची ने एक सवाल के जवाब में कहा, "हम कम से कम छह महीने तक इस स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं और अपने देश की सुरक्षा के लिए हर स्तर तक जाएंगे।" यह बयान उस समय आया जब अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान संघर्ष समाप्त करने के लिए युद्धविराम की कोशिश कर रहा है।
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अमेरिका से संपर्क किया है और युद्धविराम की इच्छा जताई है, लेकिन यह तभी संभव होगा जब होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खुला और सुरक्षित हो। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक यह शर्त पूरी नहीं होती, अमेरिका अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ईरान की ओर से यह प्रस्ताव किस अधिकारी ने रखा।
28 फरवरी को विवाद की शुरुआत
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान का नया नेतृत्व पहले से अधिक समझदार है और उसने युद्धविराम का अनुरोध किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित नहीं किया गया, तो अमेरिका की कार्रवाई और तेज हो सकती है।
इस विवाद की शुरुआत 28 फरवरी को हुई, जब अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों, परमाणु सुविधाओं और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया। प्रारंभिक हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की भी खबर आई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई।
इसके जवाब में, ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों की एक श्रृंखला शुरू की, जो इज़राइल, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और पश्चिम एशिया के अन्य सहयोगी देशों को लक्षित कर रहे थे। अब यह टकराव एक बड़े क्षेत्रीय संघर्ष का रूप ले चुका है, जहां दोनों पक्ष लगातार हमले कर रहे हैं और आगे की सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
