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ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा कदम: अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ उठाए गए सख्त कदम

तेहरान में तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। आईआरजीसी ने चेतावनी दी है कि केवल पश्चिमी देशों से जुड़े जहाजों पर हमले किए जाएंगे। इस स्थिति ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है, क्योंकि यह जलमार्ग दुनिया के तेल परिवहन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ईरान ने चीनी जहाजों को विशेष छूट देने का संकेत दिया है, जिससे चीन के लिए तेल आयात जारी रखना आसान हो सकता है।
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ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर कड़ा कदम: अमेरिका और इज़राइल के खिलाफ उठाए गए सख्त कदम

तेहरान में बढ़ता तनाव


नई दिल्ली : तेहरान में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के जवाब में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर कठोर कदम उठाए हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने स्पष्ट किया है कि केवल पश्चिमी देशों से जुड़े जहाजों पर ही हमले किए जाएंगे। यह निर्णय वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला रहा है, क्योंकि इस जलमार्ग से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल का परिवहन करता है। जहाजों की रुकावट से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।


आईआरजीसी की चेतावनी

ईरान के आईआरजीसी ने कहा है कि युद्ध के समय में होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का अधिकार उनके पास है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए यह घोषणा की कि अमेरिका, इज़राइल, यूरोप या उनके सहयोगियों का कोई भी जहाज दिखते ही उसे निशाना बनाया जाएगा। सरकारी मीडिया ने इस बयान को प्रमुखता से प्रसारित किया है।


चीनी जहाजों को विशेष छूट

मंगलवार को ईरान ने संकेत दिया कि केवल चीनी ध्वज वाले जहाजों को ही जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। अधिकारियों ने इसे बीजिंग के समर्थन के प्रति आभार के रूप में देखा। यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि फारस की खाड़ी के बंदरगाहों का यही एकमात्र निकास है, जिससे चीन के लिए तेल आयात जारी रखना आसान हो सकता है।


इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने यह घोषणा सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के माध्यम से की। युद्ध शुरू होने के बाद से यह महत्वपूर्ण जलमार्ग लगभग ठप हो गया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है।


वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल और गैस की आवाजाही रुक गई है। अधिकांश जहाज कप्तान जोखिम से बचने के लिए रुक गए हैं, और कंपनियां अब वैकल्पिक मार्गों की तलाश कर रही हैं। विश्लेषकों का मानना है कि एशिया-यूरोप के मुख्य मार्ग पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन खाड़ी क्षेत्र का व्यापार गंभीर रूप से प्रभावित होगा।


कुवैत और दुबई के पास जहाजों की स्थिति

पहले कभी भी इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह से बंद नहीं किया गया। 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी तेल टैंकर चलते रहे। अब लाइव ट्रैकिंग से यह स्पष्ट हो रहा है कि कुवैत और दुबई के पास सैकड़ों जहाज खड़े हैं। ईरान का अपना बेड़ा बंदर अब्बास के पास लंगर डाले हुए है। स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।