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ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता नियंत्रण: चीन के जहाज को रोका गया

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अपने नियंत्रण को और मजबूत करते हुए एक चीनी जहाज को रोक दिया है। भारतीय जहाजों पर हमले के बाद, आईआरजीसी ने स्पष्ट किया है कि अब कोई भी जहाज बिना मंजूरी के नहीं गुजर सकता। भारत ने ईरान से अपनी चिंताओं को साझा किया है, जबकि ईरान अपने नियमों में बदलाव कर रहा है। जानें इस स्थिति के पीछे की रणनीति और भारत की प्रतिक्रिया के बारे में।
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ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ता नियंत्रण: चीन के जहाज को रोका गया

ईरान का कड़ा रुख

होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति गंभीर हो गई है। युद्ध की आशंका फिर से बढ़ गई है, और हाल ही में आईआरजीसी (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) की गतिविधियाँ फिर से बढ़ती नजर आ रही हैं। यह संगठन इमाम खामिनेई के निर्देशों के तहत कार्य कर रहा है। भारतीय जहाज पर हमले के बाद, एक नई घटना में आईआरजीसी ने एक चीनी जहाज को भी होर्मुज पार करने से रोक दिया है। उसे स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि वह तुरंत पीछे नहीं हटता, तो उसे निशाना बनाया जा सकता है। यह स्थिति दर्शाती है कि चीन, जो पहले ईरान का प्रमुख साझेदार माना जाता था, अब बिना अनुमति के होर्मुज से गुजरने की अनुमति नहीं पा रहा है। मुंबई में ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने पुष्टि की है कि 'सन प्रॉफिट' नामक चीनी जहाज को स्टेट ऑफ फोरमोस से वापस लौटना पड़ा।


नए नियमों का प्रभाव

आईआरजीसी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब कोई भी जहाज बिना विशेष मंजूरी के इस जलमार्ग से नहीं गुजर सकता। इसका अर्थ है कि अब कोई सामान्य स्वीकृति प्रणाली नहीं है; प्रत्येक जहाज को अलग से अनुमति लेनी होगी। इसका मतलब यह है कि होर्मुज अब पूरी तरह से ईरान के नियंत्रण में है, और किसी भी देश के लिए यहाँ से गुजरना आसान नहीं रह गया है। हाल ही में भारत के दो जहाजों पर फायरिंग की घटनाएँ भी हुई थीं, जिसके बाद भारत सरकार ने ईरान के राजदूत को तलब किया। विदेश सचिव ने अपनी चिंता व्यक्त की और कहा कि भारतीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। भारत ने यह भी कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। हालांकि, ईरान ने केवल इतना कहा कि वह भारत की चिंताओं को अपने अधिकारियों तक पहुँचाएगा।


ईरान की रणनीति

फरवरी के अंत से, ईरान ने होर्मुज पर सख्त नियंत्रण लागू किया है। पहले यह कहा गया था कि चीन, भारत और पाकिस्तान जैसे देशों को कुछ छूट दी जाएगी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। ईरान अपने नियमों को बदल रहा है और हर जहाज को अलग-अलग आधार पर देख रहा है। इसका तात्पर्य यह है कि आज का मित्र कल का दुश्मन बन सकता है। ईरान का मानना है कि दुश्मन चौकस है और किसी भी समय हमला कर सकता है, इसलिए हर जहाज को रोककर उन्हें क्रमशः अनुमति दी जा रही है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इजराइल-लेबनान संघर्ष के बाद, ईरान ने होर्मुज को खोलने का ऐलान किया था, लेकिन कुछ समय बाद उसने अपने पुराने नियंत्रण में लौटने का निर्णय लिया। इसके पीछे डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों को जिम्मेदार ठहराया गया है।