ईरान के खिलाफ अमेरिका के फाइटर जेट्स की स्थिति पर गंभीर सवाल
हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ अमेरिका के फाइटर जेट्स की स्थिति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के 16 सैन्य विमानों को या तो नष्ट कर दिया गया है या वे उड़ान के लिए अनुपयुक्त हो गए हैं। विशेष रूप से एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट की आपातकालीन लैंडिंग ने चिंता बढ़ा दी है। जानें इस संघर्ष में क्या हुआ और ईरान के दावों की सच्चाई क्या है।
| Mar 20, 2026, 15:27 IST
क्या अमेरिका का वर्चस्व खत्म हो रहा है?
क्या ईरान के आसमान में अमेरिकी फाइटर जेट्स की स्थिति चिंताजनक हो गई है? क्या अमेरिका की शक्ति अब कमजोर पड़ रही है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पिछले 20 दिनों के आंकड़ों ने वाशिंगटन में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस भीषण संघर्ष में अमेरिका के 16 सैन्य विमानों को या तो नष्ट कर दिया गया है या वे इतने क्षतिग्रस्त हो गए हैं कि उड़ान के लिए अनुपयुक्त हो गए हैं। यह केवल ड्रोन की बात नहीं है, बल्कि इसमें वे शिकारी विमान भी शामिल हैं जिन्हें दुनिया ने अजेय माना था। सबसे चौंकाने वाली खबर एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट के बारे में है, जो रडार से बचने की अपनी क्षमता के लिए जाना जाता है। हालाँकि, रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की प्रतिक्रिया ने इस विमान की प्रतिष्ठा को धूमिल कर दिया है। एक अमेरिकी एयरबेस पर इसे आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। पायलट तो सुरक्षित है, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या अमेरिका का आसमान पर नियंत्रण अब समाप्त हो गया है?
शिकारी खुद शिकार बन गया
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एक बड़ा हमला किया।
इस हमले का उद्देश्य ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामिने की हत्या करना था। यह ईरान के लिए केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी, बल्कि इसकी प्रतिष्ठा पर भी चोट थी। इसके बाद, मिसाइलों, ड्रोन और आत्मघाती हमलों का एक सिलसिला शुरू हुआ जिसने मध्य पूर्व के नक्शे को हिला कर रख दिया। इन 16 विमानों में से 10 एमक्यू-9 रिपर ड्रोन हैं, जो बिना पायलट के दूर से हमले करते हैं। ईरान का दावा है कि उसने इन्हें आसानी से नष्ट कर दिया। लेकिन कहानी केवल ड्रोन तक सीमित नहीं है। कुवैत में अमेरिका के तीन A15 फाइटर जेट्स अपनी ही सेना की गलती से गिर गए। एक KC-135 टैंकर विमान भी दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें छह क्रू मेंबर्स की जान चली गई। सऊदी अरब में ईरानी मिसाइलों ने पांच टैंकर विमानों को नष्ट कर दिया। अमेरिका इसे तकनीकी खराबी बता रहा है, लेकिन ईरान के दावे यह दर्शाते हैं कि शिकारी खुद शिकार बन गया है।
ईरान का दावा: एफ-35 को कैसे निशाना बनाया गया?
ईरानी मीडिया के अनुसार, इस हमले में स्वदेशी बावर-373 वायु रक्षा प्रणाली का उपयोग किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि निष्क्रिय सेंसर तकनीक ने रडार सिग्नल उत्पन्न किए बिना स्टील्थ विमान का पता लगाने में मदद की। हालांकि स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है, ईरानी मीडिया का दावा है कि इस प्रणाली ने जेट को सटीकता से निशाना बनाया। अमेरिका ने भी स्वीकार किया है कि एफ-35 को मध्य पूर्व में एक अमेरिकी एयरबेस पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि यह विमान ईरान के ऊपर एक लड़ाकू मिशन पर था और सुरक्षित रूप से उतरा। वर्तमान में इस घटना की विस्तृत जांच चल रही है।
एफ-35 पर हमला क्यों महत्वपूर्ण है?
एफ-35 को अमेरिकी और सहयोगी देशों की वायु शक्ति का मुख्य आधार माना जाता है।
इसकी कीमत 10 करोड़ डॉलर से अधिक है और इसमें स्टील्थ विशेषताएँ, उन्नत सेंसर और अगली पीढ़ी की युद्धक्षेत्र नेटवर्किंग क्षमताएँ शामिल हैं। यह वायु-से-वायु युद्ध, वायु-से-भूमि बमबारी और निगरानी कर सकता है। इसकी गति 1,900 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक है और यह अत्यधिक सुरक्षित हवाई क्षेत्र में बिना पता चले प्रवेश करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस जेट को मामूली क्षति भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
एफ-35 की सेंसर फ्यूजन तकनीक
इस लड़ाकू विमान की सेंसर फ्यूजन तकनीक रडार, इन्फ्रारेड सेंसर, उपग्रहों और अन्य विमानों से प्राप्त जानकारी को एकत्रित और संसाधित करती है।
यह तकनीक पायलटों को खतरों की शीघ्र पहचान करने और हमले से पहले ही प्रतिक्रिया देने में मदद करती है। यह प्रणाली एफ-35 को आधुनिक हवाई युद्ध में अद्वितीय बनाती है।
