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ईरान के दूतावास पर प्रदर्शनकारियों ने पुराना झंडा फहराया, क्या है इसका महत्व?

लंदन में ईरान के दूतावास पर प्रदर्शनकारियों ने 10 जनवरी 2026 को पुराना शेर-सूरज वाला झंडा फहराया, जो ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का प्रतीक बन गया है। इस घटना ने न केवल स्थानीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। सोशल मीडिया पर भी इस झंडे का प्रतीकात्मक महत्व बढ़ गया है। जानें इस झंडे का इतिहास और वर्तमान इस्लामिक झंडे से इसका क्या अंतर है।
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ईरान के दूतावास पर प्रदर्शनकारियों ने पुराना झंडा फहराया, क्या है इसका महत्व?

लंदन में ईरान के दूतावास पर बड़ा प्रदर्शन


ईरान में चल रहे बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच, लंदन में एक महत्वपूर्ण घटना घटी। 10 जनवरी 2026 को, प्रदर्शनकारियों ने ईरान के दूतावास पर चढ़ाई की और वर्तमान इस्लामिक गणराज्य का झंडा उतारकर 1979 से पहले का शेर-सूरज वाला झंडा फहरा दिया। यह घटना केंसिंग्टन क्षेत्र में हुई, जहां सैकड़ों लोग 'फ्री ईरान' के नारे लगा रहे थे। हालांकि कुछ समय बाद झंडा हटा दिया गया, लेकिन यह विरोध का एक मजबूत प्रतीक बन गया।


सोशल मीडिया पर बदलाव

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने भी ईरान के झंडे वाले इमोजी को बदलकर शेर-सूरज वाले प्रतीक में परिवर्तित कर दिया। यह बदलाव 9 जनवरी से लागू हुआ, जिससे ईरान के आधिकारिक अकाउंट्स पर भी पुराना झंडा दिखाई देने लगा। प्रदर्शनकारियों ने इसे समर्थन के रूप में देखा।


शेर-सूरज वाला झंडा: एक सांस्कृतिक प्रतीक

यह झंडा हरा, सफेद और लाल रंगों का है, जिसमें एक तलवार लिए शेर और उसके पीछे सूरज का चित्र है। यह प्रतीक ईरान की प्राचीन संस्कृति से जुड़ा हुआ है। शेर शक्ति और साहस का प्रतीक है, जबकि सूरज प्राचीन ईरानी आस्थाओं का प्रतिनिधित्व करता है।


यह झंडा अश्कानियन, सासानी, सफवी, अफ्शारी और काजार जैसे राजवंशों के समय में भी इस्तेमाल होता रहा। 1906 की संवैधानिक क्रांति के बाद इसे औपचारिक राष्ट्रीय झंडा बनाया गया और 1979 तक यह ईरान का आधिकारिक झंडा था।


वर्तमान इस्लामिक झंडे की विशेषताएँ

1979 की इस्लामी क्रांति के बाद, शाह मोहम्मद रजा पहलवी की सत्ता समाप्त हुई और अयातुल्ला खामेनेई के नेतृत्व में इस्लामिक गणराज्य की स्थापना हुई। 1980 में नया झंडा अपनाया गया, जिसमें भी हरा, सफेद और लाल रंग है, लेकिन इसमें शेर-सूरज का प्रतीक नहीं है। हरे और लाल पट्टियों के किनारों पर कूफी लिपि में 'अल्लाहु अकबर' 22 बार लिखा गया है।


हरा रंग इस्लाम और शहादत, सफेद शांति और ईमानदारी, और लाल बलिदान और क्रांति के खून का प्रतीक माना जाता है। यह झंडा न केवल राष्ट्रीय, बल्कि धार्मिक और क्रांति की विचारधारा से भी जुड़ा है।


प्रदर्शनों में झंडे का महत्व

विरोधी पुराने शेर-सूरज झंडे को इसलिए अपनाते हैं क्योंकि वे राजशाही या गैर-धार्मिक शासन की वापसी की इच्छा रखते हैं। यह झंडा अब राजशाही समर्थकों और विदेश में रहने वाले ईरानियों के बीच विरोध का एक बड़ा प्रतीक बन गया है। पिछले दो हफ्तों से चल रहे प्रदर्शनों में कम से कम 116 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,600 से अधिक गिरफ्तारियां हुई हैं। इंटरनेट बंद होने के कारण जानकारी सीमित है, लेकिन यह घटना विरोध की गहराई को दर्शाती है।