ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की रहस्यमय अनुपस्थिति: असली सत्ता किसके हाथ में?
ईरान में मोजतबा खामेनेई की रहस्यमय स्थिति
नई दिल्ली: विश्व राजनीति में यह एक असामान्य घटना है जब किसी देश का शीर्ष नेता सत्ता ग्रहण करने के बाद कई हफ्तों तक सार्वजनिक रूप से अनुपस्थित रहता है। ईरान में नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई की इसी रहस्यमयी स्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनके सामने न आने से देश की वास्तविक सत्ता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक बड़े सैन्य हमले में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु हो गई, जो ईरान के लिए एक बड़ा झटका था। इसके बाद 9 मार्च को मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया। लेकिन सत्ता संभालने के बाद से वे अब तक सार्वजनिक रूप से नहीं आए हैं, जिससे उनकी स्थिति पर संदेह बना हुआ है।
क्या मोजतबा खामेनेई गंभीर रूप से घायल हैं?
खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, जिस हमले में अली खामेनेई की मौत हुई, उसमें मोजतबा भी घायल हुए थे। यह माना जा रहा है कि उनकी चोटें गंभीर हैं, जिसके कारण वे सार्वजनिक रूप से उपस्थित नहीं हो पा रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी स्थिति इतनी नाजुक हो सकती है कि वे वीडियो संदेश भी नहीं दे पा रहे हैं, जिससे उनकी वास्तविक स्थिति उजागर हो सकती है।
बयान जारी, लेकिन खुद नहीं दिखे
हालांकि, मोजतबा खामेनेई ने दो बार संदेश जारी किए हैं, लेकिन वे व्यक्तिगत रूप से सामने नहीं आए। पहला संदेश 12 मार्च को एक टीवी एंकर द्वारा पढ़ा गया, जिसमें अमेरिका के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात की गई। दूसरा संदेश 20 मार्च को ईरानी नववर्ष के अवसर पर आया, जिसमें जनता की सराहना की गई। सरकारी मीडिया ने उनका एक पुराना वीडियो भी जारी किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वह कब का है।
ईरान की असली ताकत किसके हाथ में है?
मोजतबा की अनुपस्थिति के कारण सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ईरान की असली सत्ता किसके पास है। रिपोर्टों के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) इस समय देश में महत्वपूर्ण निर्णय ले रहा है। इसका मतलब यह है कि भले ही मोजतबा औपचारिक रूप से सुप्रीम लीडर हों, लेकिन जमीनी स्तर पर सेना जैसी ताकतें अधिक सक्रिय हैं।
संघर्ष जारी, रुख सख्त
इस बीच, इजरायल के हमले जारी हैं और ईरान के कई प्रमुख नेता निशाने पर हैं। हाल के दिनों में IRGC के वरिष्ठ कमांडर गुलामरजा सुलेमानी और रणनीतिक मामलों से जुड़े अली लारीजानी जैसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों की भी मौत हो चुकी है, जिससे ईरान के नेतृत्व पर दबाव बढ़ गया है।
इन परिस्थितियों के बावजूद, ईरान ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है। देश लगातार जवाबी कार्रवाई कर रहा है, जिसमें मिसाइल हमले और समुद्री रास्तों पर नियंत्रण शामिल है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल मार्गों में से एक है, अभी भी बंद है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हो रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि एक व्यक्ति की अनुपस्थिति से देश की व्यवस्था नहीं रुकती। लेकिन मोजतबा की अनुपस्थिति और लगातार हो रहे हमलों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि ईरान की असली ताकत क्या है- उसकी मजबूती या उसकी कमजोरी।
