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ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की बातचीत विफल, ट्रंप ने शुरू किया ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच, अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए की गई बातचीत की असफलता का खुलासा किया है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने बताया कि ओमान और स्विट्जरलैंड में हुई तीन दौर की बातचीत में ईरान ने कभी भी गंभीरता नहीं दिखाई। इसके परिणामस्वरूप, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को मंजूरी दी। जानिए इस बातचीत के दौरान क्या हुआ और ईरान की रणनीति क्या थी।
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ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की बातचीत विफल, ट्रंप ने शुरू किया ऑपरेशन एपिक फ्यूरी

अमेरिकी प्रशासन का बड़ा खुलासा

मध्य पूर्व में चल रहे गंभीर संघर्ष के बीच, अमेरिकी प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। व्हाइट हाउस के उच्च अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए ओमान और स्विट्जरलैंड में आयोजित तीन दौर की बातचीत पूरी तरह से असफल रही। इसी असफलता के परिणामस्वरूप राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को मंजूरी दी।


अमेरिकी डिप्लोमैट्स की ईरान के साथ बातचीत

अमेरिकी डिप्लोमैट्स ने हफ्तों तक ईरान के अधिकारियों के साथ बातचीत की। उन्होंने ओमान और स्विट्जरलैंड में जाकर कई प्रयास किए, इंसेंटिव दिए और बार-बार लौटते रहे। अंततः, उन्होंने यह निष्कर्ष निकाला कि यह सब समय की बर्बादी थी और अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति ट्रंप को प्रस्तुत की।


बातचीत के दौरान ईरान की रणनीति

मंगलवार को, वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान पर संभावित हमले के संदर्भ में रिपोर्टर्स को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीन दौर की बातचीत के दौरान ईरान ने कभी भी अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को छोड़ने के लिए गंभीरता नहीं दिखाई।


ईरान की देरी और धमकियां

अधिकारियों ने ओमान और स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के दौरान ईरान की ओर से देरी, धमकियों और 'झूठे दिखावे' के पैटर्न का उल्लेख किया। पहले दौर की बातचीत धमकियों के साथ शुरू हुई, जिसमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि यूरेनियम एनरिचमेंट उनका 'अटूट अधिकार' है।


ईरान की कूटनीति पर टिप्पणी

अराघची ने यह भी कहा कि ईरान अमेरिका को कूटनीति के माध्यम से वह हासिल नहीं करने देगा जो वह सैन्य तरीके से प्राप्त नहीं कर सकता। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी बात को वापस लेने की कोशिश की। एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि यह बयान इस बात का संकेत था कि बातचीत किस दिशा में जा रही थी।


ड्राफ्ट प्रपोजल की अनुपस्थिति

दूसरे दौर की बातचीत से पहले, वॉशिंगटन ने तेहरान से एक लिखित ड्राफ्ट प्रपोजल जमा करने के लिए कहा। ईरान ने सहमति जताई, लेकिन अमेरिका का दावा है कि कोई दस्तावेज प्राप्त नहीं हुआ। एक अधिकारी ने कहा, 'हमारे पास एक एयरक्राफ्ट कैरियर है, जिसके बारे में वे शिकायत कर रहे हैं, और दूसरा रास्ते में है — फिर भी हम उनसे ड्राफ्ट एग्रीमेंट नहीं ले पा रहे हैं।' यह स्थिति ईरान के इरादों के बारे में क्या संकेत देती है?