ईरान के राजदूत की ब्रिक्स देशों से अपील: अमेरिका और इजरायल की निंदा करें
ईरान की अपील
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने ब्रिक्स देशों से एक महत्वपूर्ण मांग की है। उन्होंने कहा कि तेहरान को उम्मीद है कि यह समूह युद्ध के दौरान अमेरिका और इजरायल के अवैध और आपराधिक कार्यों की निंदा करेगा। भारत के दृष्टिकोण पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का संवाद और संयम का आह्वान सराहनीय है। उनका मानना है कि इस तरह की परिस्थितियों में भारत जैसे देशों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है।
ईरान की स्थिति
फथाली ने स्पष्ट किया कि ईरान ने कभी भी युद्ध की इच्छा नहीं जताई है और बार-बार कहा है कि वह संघर्ष शुरू नहीं करेगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि ईरान पर युद्ध थोपा गया, तो इसका प्रबंधन पूरी तरह से ईरान के हाथ में होगा। वर्तमान में जो कुछ हो रहा है, वह बाहरी हमलों के खिलाफ वैध आत्मरक्षा है।
अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों की निंदा
राजदूत ने कहा कि ईरान सभी स्वतंत्र और स्वतंत्रता पसंद देशों से अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की स्पष्ट निंदा की अपेक्षा करता है। उन्होंने बताया कि अमेरिका और इजरायल ने अस्पतालों, आवासीय क्षेत्रों, स्कूलों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है, जिससे ईरान की राष्ट्रीय संप्रभुता का उल्लंघन हुआ है।
ब्रिक्स का सदस्यता और स्थिति
28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, लेकिन इस मामले में ब्रिक्स ने अब तक चुप्पी साध रखी है। वर्तमान में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, इंडोनेशिया और ईरान सहित 11 सदस्य देश हैं। यह समूह वैश्विक दक्षिण के देशों की आवाज है, लेकिन अभी तक किसी भी पक्ष में कोई बयान नहीं आया है। ईरान को 2024 में इसका सदस्य बनाया गया था और वर्तमान में भारत ब्रिक्स का अध्यक्ष है।
ब्रिक्स समूह की दुविधा
ब्रिक्स के सामने एक असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। चीन और रूस ने ईरान का समर्थन किया है और इजरायल तथा अमेरिकी हमलों की कड़ी निंदा की है। हालांकि, ब्रिक्स के सदस्य सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। यदि ब्रिक्स अमेरिका और इजरायल की निंदा करता है, तो उसे सऊदी अरब और यूएई में होने वाले हमलों की भी निंदा करनी होगी, जो ईरान की आईआरजीसी द्वारा अंजाम दिए जा रहे हैं। इस स्थिति में किसी एक पक्ष में बयान देने से समूह में फूट पड़ने की आशंका है, इसलिए भारत और मिस्र जैसे देशों ने संतुलित रुख अपनाया है।
