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ईरान के हमले: अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ शिया देशों का निशाना

ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद मिडिल ईस्ट के कई देशों पर हमले तेज कर दिए हैं। इन देशों में बहरीन, कुवैत, और अजरबैजान शामिल हैं, जो अमेरिकी सैन्य ठिकानों के निकट स्थित हैं। ईरान के हमले शिया देशों को भी प्रभावित कर रहे हैं, जहां शिया समुदाय की संख्या अधिक है। इस लेख में जानें कि ईरान इन देशों को क्यों निशाना बना रहा है और इसके पीछे के कारण क्या हैं।
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ईरान के हमले: अमेरिकी ठिकानों के खिलाफ शिया देशों का निशाना

ईरान का मिडिल ईस्ट में हमला

अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद, ईरान ने मिडिल ईस्ट के उन देशों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू कर दिया है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने स्थित हैं। ईरान के हमले अभी भी जारी हैं, और जिन देशों को निशाना बनाया गया है, वे सभी मजबूत सैन्य क्षमताओं से लैस हैं। हालांकि, इन देशों ने अब तक ईरान पर कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है। इन देशों में बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब, यूएई, क़तर, तुर्की और अजरबैजान शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से कई शिया देश हैं, जहां शिया समुदाय की संख्या अधिक है। ईरान को एक शिया नेतृत्व वाले देश के रूप में जाना जाता है, जिससे यह सवाल उठता है कि ईरान सुन्नी देशों के साथ-साथ शिया देशों को भी क्यों निशाना बना रहा है?


हमलों का विस्तार

ईरान ने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और नागरिक बुनियादी ढांचों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। ये हमले अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर की गई कार्रवाइयों के बाद बढ़े तनाव का हिस्सा हैं। इन हमलों ने खाड़ी देशों में हड़कंप मचा दिया है और स्थानीय वायु रक्षा प्रणालियां सक्रिय हो गई हैं। ईरान ने बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के मुख्यालय और कुवैत में अली अल सलेम और मीना अल अहमदी रिफाइनरी जैसे ठिकानों को निशाना बनाया है। बहरीन में शियाओं की संख्या लगभग 65% है, लेकिन वहां सुन्नी अल खलीफा परिवार का शासन है। यह देश अमेरिका का करीबी सहयोगी है और हाल के वर्षों में इसके इजराइल के साथ संबंध भी मजबूत हुए हैं। कुवैत में भी शियाओं की संख्या लगभग आधी है, और यह भी अमेरिका और इजराइल का करीबी साथी है। वर्तमान में कुवैत का राजा सुन्नी है।


अजरबैजान पर हमले

अजरबैजान, एक और शिया देश, भी ईरान के हमलों का शिकार बना है। यहां ईरान ने नक्शीवान स्वायत्त गणराज्य में ड्रोन हमले किए हैं, जिससे नागरिकों और हवाई अड्डों को नुकसान पहुंचा है। अजरबैजान के अमेरिका के साथ संबंध मजबूत नहीं हैं, लेकिन यह इजराइल का एक महत्वपूर्ण मित्र है, जो यहां से गैस और तेल खरीदता है। अजरबैजान और ईरान के बीच सीमा विवाद के कारण संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। ईरान इन शिया देशों पर हमले कर रहा है क्योंकि ये देश अमेरिका और इजराइल के मजबूत सहयोगी हैं। भारत में भी शिया समुदाय की अच्छी खासी संख्या है, जो मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, कश्मीर और लद्दाख में बसा हुआ है। भारत में शियाओं का एक बड़ा हिस्सा इस युद्ध में ईरान का समर्थन करता दिख रहा है। हालांकि, इस युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।