ईरान ने ट्रम्प के शांति प्रस्ताव को किया खारिज, अमेरिका की आक्रमण योजनाओं पर उठे सवाल
ईरान का शांति प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया
ईरान ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा प्रस्तुत 15 सूत्री शांति प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इसे अवास्तविक और अनुचित करार दिया। उन्होंने बताया कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है, और सभी संवाद मध्यस्थों के माध्यम से ही हुए हैं। अल अरबिया न्यूज़ के अनुसार, बगाई ने कहा कि ईरान को भेजे गए प्रस्ताव ज्यादातर अवास्तविक और अत्यधिक हैं। इस प्रस्ताव का विवरण अभी तक उपलब्ध नहीं है, लेकिन ट्रम्प ने पहले दावा किया था कि ईरान ने शर्तों पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए ईरान को भेजा गया था, हालांकि बातचीत को लेकर अनिश्चितता का भी संकेत दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति की बातचीत की रणनीति
79 वर्षीय अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि वे ईरान के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बातचीत कर रहे हैं। उनके अनुसार, हमारे दूत हैं, लेकिन हम सीधे तौर पर भी संवाद कर रहे हैं। ईरान के साथ बातचीत में हमेशा अनिश्चितता बनी रहती है, क्योंकि बातचीत के बाद उन्हें हमेशा किसी न किसी तरह से जवाब देना पड़ता है।
क्या अमेरिका जमीनी आक्रमण की योजना बना रहा है?
ईरान द्वारा शांति प्रस्ताव को अस्वीकार करने का निर्णय उन अटकलों के बीच आया है कि अमेरिकी सेना इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ जमीनी आक्रमण की योजना बना रही है। हालांकि, वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह व्यापक आक्रमण होने की संभावना नहीं है, और इसका ध्यान खारग द्वीप पर कब्जा करने और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सीमित हमलों पर केंद्रित होगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रम्प ने अभी तक इस योजना को मंजूरी नहीं दी है, लेकिन उन्होंने खारग द्वीप पर कब्जा करने का संकेत दिया है, जो फारस की खाड़ी में ईरान का मुख्य तेल स्रोत है। ट्रम्प ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि उनकी सबसे बड़ी इच्छा ईरान के तेल भंडार पर कब्जा करना है, लेकिन अमेरिका में कुछ लोग इसे गलत मानते हैं।
