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ईरान ने पाकिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को किया ढेर, बढ़ा तनाव

ईरान की सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की है, जिसमें कई आतंकवादी मारे गए हैं। यह घटना सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के रास्क क्षेत्र में हुई, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। जैश अल-अदल नामक आतंकवादी समूह की पूरी टीम को नष्ट कर दिया गया है। इस घटना के बाद सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। जानें इस संगठन के बारे में और ईरान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते खतरे के बारे में।
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ईरान ने पाकिस्तान से घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों को किया ढेर, बढ़ा तनाव

ईरान की सुरक्षा बलों की कार्रवाई


नई दिल्ली: ईरान के सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान की सीमा से घुसपैठ करने वाले कई आतंकवादियों को मार गिराया है। यह घटना ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के रास्क क्षेत्र में हुई, जहां आतंकवादी पाकिस्तान से प्रवेश कर रहे थे। इस कार्रवाई ने दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ा दिया है।


घटना का विवरण

ईरानी सुरक्षा बलों ने जैश अल-अदल नामक आतंकवादी समूह की पूरी ऑपरेशनल टीम को नष्ट कर दिया। सरकारी मीडिया के अनुसार, ये आतंकवादी पाकिस्तान की खुली सीमा पार करके रास्क क्षेत्र में घुसपैठ कर रहे थे। ईरानी सेना ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें समाप्त कर दिया।


ऑपरेशन के दौरान आतंकियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया गया। यह घटना उस समय हुई है जब दोनों देश वार्ता की तैयारी कर रहे थे, जिससे सीमा पर सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।


जैश अल-अदल का परिचय

जैश अल-अदल एक बलूच सुन्नी आतंकवादी संगठन है, जिसकी स्थापना लगभग 2012 में हुई थी। अरबी में इसका अर्थ 'न्याय की सेना' है। यह संगठन पहले सक्रिय रहे जंदुल्लाह गुट के सदस्यों से बना माना जाता है।


यह समूह खुद को ईरान के सुन्नी बलूच समुदाय के अधिकारों के लिए लड़ने वाला बताता है। इसके मुख्य उद्देश्य सिस्तान-बलूचिस्तान क्षेत्र में राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों की मांग करना और बलूच लोगों पर हो रहे कथित भेदभाव के खिलाफ संघर्ष करना है, लेकिन ईरान और कई अन्य देशों द्वारा इसे आतंकवादी संगठन माना जाता है।


संगठन की गतिविधियां

जैश अल-अदल मुख्य रूप से ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत, पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र और अफगानिस्तान की सीमाओं पर सक्रिय है। यह ईरानी पुलिस और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर हमले करता रहा है। रास्क क्षेत्र में इस संगठन के साथ सुरक्षा बलों की कई झड़पें हो चुकी हैं।


ईरान का आरोप है कि यह संगठन देश के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में अस्थिरता फैलाता है और सुरक्षा बलों को निशाना बनाता है। संगठन की गतिविधियां वर्षों से जारी हैं, जिससे क्षेत्र में लगातार तनाव बना रहता है।


सीमा पर बढ़ता खतरा

ईरान-पाकिस्तान की सीमा काफी लंबी और खुली है, जहां घुसपैठ करना आसान हो जाता है। दोनों देश अक्सर एक-दूसरे पर आतंकवादियों को शरण देने का आरोप लगाते रहते हैं। इस घटना के बाद सिस्तान बॉर्डर पर सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है।


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