ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के आरोपों को किया खारिज
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि ईरान एक जिम्मेदार शक्ति है और समुद्री स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। खतीबज़ादेह ने अमेरिका और इज़राइल पर बिना उकसावे के आक्रमण करने का आरोप लगाया और अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता को दोहराया। उनका कहना है कि भविष्य में कूटनीति ही एकमात्र विकल्प है।
| Mar 6, 2026, 16:15 IST
ईरान की स्थिरता की भूमिका
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबज़ादेह ने स्पष्ट किया है कि तेहरान फारस की खाड़ी में एक जिम्मेदार शक्ति बना हुआ है। उन्होंने उन आरोपों को नकारा है कि ईरान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। रायसीना संवाद 2026 में बोलते हुए, खतीबज़ादेह ने कहा कि इज़राइल और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बावजूद, ईरान एक स्थिरकारी शक्ति के रूप में कार्य कर रहा है।
जलडमरूमध्य की स्थिति
उन्होंने कहा कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का निर्णय लेता है, तो इसकी घोषणा की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान में ऐसा कोई इरादा नहीं है। खतीबज़ादेह ने ईरान को समुद्री स्थिरता का एक प्रमुख गारंटर बताया और कहा कि उनकी उपस्थिति इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और अमेरिका की भूमिका
मंत्री ने यह भी कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानून और नौवहन की स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने अमेरिका पर समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया। खतीबज़ादेह ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की आलोचना करते हुए कहा कि ट्रम्प ईरान के नेतृत्व को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि वे अपने देश में स्थानीय राजनीतिक नियुक्तियों को भी नियंत्रित नहीं कर सकते।
संघर्ष और ईरान का दृष्टिकोण
उप विदेश मंत्री ने मौजूदा संघर्ष को अस्तित्व का युद्ध बताते हुए अमेरिका और इज़राइल पर बिना उकसावे के आक्रमण करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान पर खतरा पैदा करने के झूठे आरोपों के आधार पर हमले किए जा रहे हैं। खतीबज़ादेह ने किसी भी हमले का कड़ा जवाब देने की चेतावनी दी और कहा कि ईरान को अपने बचाव के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
भारत और ईरान के संबंध
मंत्री ने भारत और ईरान के संबंधों को शतरंज की तुलना करते हुए कहा कि भविष्य में कूटनीति ही एकमात्र विकल्प है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सरकारी अधिकारियों को निशाना बनाए जाने की निंदा की और इसे एक खतरनाक प्रवृत्ति बताया।
