ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद का संकट: क्या होगा आगे?
नई दिल्ली में बढ़ते तनाव का आलम
नई दिल्ली: 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' का आगाज किया। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई समेत कई प्रमुख नेता मारे गए। ईरान ने इसे एक गंभीर अपराध करार दिया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने इसे मुसलमानों और शिया समुदाय के खिलाफ एक युद्ध की घोषणा बताया है। ईरान ने प्रतिशोध की कसम खाई है।
ईरान का प्रतिशोध
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए गल्फ देशों पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। शनिवार और रविवार को रियाद (सऊदी अरब), दुबई-अबू धाबी (UAE), दोहा (कतर), और मनामा (बहरीन) में विस्फोटों की खबरें आईं। दुबई में पाम आइलैंड्स के निकट आग लग गई, जबकि बहरीन में अमेरिकी 5th फ्लीट मुख्यालय को निशाना बनाया गया। कतर के अल उदैद एयर बेस और अन्य स्थानों पर भी हमले हुए।
इजरायल में तेल अवीव और Beit Shemesh में भी हमले हुए, जहां एक सिनागॉग पर हमला कर 9 लोगों की जान ले ली गई। जॉर्डन में जर्मन आर्मी कैंप और इराक के अर्बिल बेस पर भी हमले हुए, लेकिन वहां कोई हताहत नहीं हुआ। इन हमलों ने नागरिक क्षेत्रों को भी प्रभावित किया।
E3 देशों की प्रतिक्रिया
1 मार्च 2026 को फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन (E3 देशों) ने एक संयुक्त बयान जारी किया। उन्होंने ईरान के इन हमलों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि ईरान ने बिना किसी कारण के क्षेत्रीय देशों पर हमला किया, जो अमेरिका-इजरायल ऑपरेशन में शामिल नहीं थे, जिससे उनकी सुरक्षा को खतरा हुआ।
E3 ने चेतावनी दी कि वे अपने हितों और सहयोगियों की रक्षा के लिए आवश्यक डिफेंसिव एक्शन लेंगे। वे ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को स्रोत से नष्ट करने के लिए कदम उठा सकते हैं। तीनों देश अमेरिका और क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेंगे।
तनाव का कारण
यह सब अमेरिका-इजरायल के हमलों से शुरू हुआ, जिसमें ईरान के न्यूक्लियर साइट्स, मिसाइल सुविधाएं और नेता निशाने पर थे। खामेनेई की मौत ने ईरान में गुस्से को भड़काया है। अब ईरान क्षेत्रीय सहयोगियों को निशाना बना रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानियों से सरकार के खिलाफ विद्रोह करने का आह्वान किया है। स्थिति बेहद गंभीर है। यदि E3 देश भी सीधे हमलों में शामिल होते हैं, तो युद्ध और बढ़ सकता है। वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ गया है। बातचीत से हालात को संभालने की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल खतरा बहुत बड़ा नजर आ रहा है।
