ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों का असर: क्या है असली स्थिति?
नई दिल्ली में बढ़ते तनाव का संकेत
नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल के हमलों के चलते ईरान को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। दोनों देशों के बयानों से स्थिति की गंभीरता स्पष्ट होती है, जबकि जमीनी स्तर पर हमले और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि संयुक्त अमेरिकी-इजरायली हमलों में 48 ईरानी नेता मारे गए हैं, जिसे उन्होंने एक महत्वपूर्ण सैन्य उपलब्धि बताया। उनका कहना है कि इतनी बड़ी कार्रवाई इतनी कम समय में अभूतपूर्व है।
इजरायली रक्षा बलों का दावा
इजरायली रक्षा बल (IDF) ने भी यह जानकारी दी है कि इस ऑपरेशन में लगभग 40 प्रमुख ईरानी सैन्य कमांडर मारे गए हैं, जिनमें ईरान के चीफ ऑफ स्टाफ अब्दुलरहीम मौसावी का नाम भी शामिल है। IDF के अनुसार, यह हमला ईरान के सर्वोच्च नेता पर हुई कार्रवाई के तुरंत बाद किया गया।
नौसैनिक मोर्चे पर नुकसान
नौसैनिक मोर्चे पर बड़ा नुकसान
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी सेनाएं ईरान की नौसेना को कमजोर करने के प्रयास में हैं। उनके अनुसार, अब तक नौ ईरानी युद्धपोत डुबो दिए गए हैं और नौसेना के मुख्यालय को भी गंभीर नुकसान पहुंचा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
ईरान की प्रतिक्रिया
ईरान ने की जवाबी कार्रवाई
हमलों के जवाब में, ईरान ने सैकड़ों मिसाइल और ड्रोन दागे हैं। इस दौरान अमेरिकी सेना ने पुष्टि की कि तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए और पांच गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जिन लोगों के मारे जाने का दावा किया गया है, उनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का नाम भी शामिल है, जिसने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।
संघर्ष का विस्तार
संघर्ष का दायरा बढ़ा
यह टकराव अब कई देशों तक फैल चुका है। ईरानी मिसाइलों ने यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की ओर भी रुख किया है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया कि अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन पर चार बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि मिसाइलें जहाज के पास तक नहीं पहुंच सकीं और वह सामान्य रूप से अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए है।
