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ईरान में अमेरिकी हवाई हमले: क्या बढ़ रहा है युद्ध का खतरा?

हाल ही में, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दक्षिणी ईरान में कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिससे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा फिर से बढ़ गया है। यह कार्रवाई ईरानी बलों द्वारा अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने की योजना के जवाब में की गई। अमेरिका ने इस हमले को आत्मरक्षा में बताया है, जबकि ईरान की प्रतिक्रिया की आशंका बनी हुई है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित परिणाम।
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ईरान में अमेरिकी हवाई हमले: क्या बढ़ रहा है युद्ध का खतरा?

नई दिल्ली में सैन्य गतिविधियों की बढ़ती चिंता


नई दिल्ली: खाड़ी क्षेत्र में चल रहे सीजफायर के बीच अचानक सैन्य गतिविधियों में तेजी आई है। मंगलवार की सुबह, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दक्षिणी ईरान में कई ईरानी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हवाई और मिसाइल हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के तहत की गई है, क्योंकि ईरानी बल अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने की योजना बना रहे थे।


युद्ध का खतरा बढ़ता हुआ

इस हमले ने दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्ग, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज', के आसपास युद्ध का खतरा फिर से बढ़ा दिया है।


सुरंग बिछाने की कोशिश नाकाम

इस कार्रवाई की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी निगरानी तंत्र ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की दो तेज नावों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाते हुए पकड़ा। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि ये नावें सफल होतीं, तो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और अमेरिकी नौसेना को गंभीर नुकसान हो सकता था। इस खतरे को देखते हुए, अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए दोनों नावों को नष्ट कर दिया।


बंदर अब्बास में मिसाइल साइट पर हमला

नावों को नष्ट करने के बाद, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास शहर को भी निशाना बनाया। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि इस क्षेत्र में एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइट ने अमेरिकी विमानों को लॉक करने का प्रयास किया था।


हवाई हमले में पूरी तरह से ध्वस्त

अमेरिकी बलों ने उस मिसाइल लॉन्चर और उसके संबंधित सैन्य ढांचे को हवाई हमले में पूरी तरह से नष्ट कर दिया। इसके अलावा, सीरिक और जास्क जैसे तटीय क्षेत्रों में भी जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं, जिसकी पुष्टि ईरानी मीडिया ने भी की है।


सीजफायर के बीच सीमित कार्रवाई का दावा

रिपोर्टों के अनुसार, वाशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि यह हमला सीमित और कुछ लक्ष्यों पर केंद्रित था। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि वे ईरान के साथ पूर्ण युद्ध नहीं चाहते और न ही इस कार्रवाई का मतलब मौजूदा युद्धविराम को समाप्त करना है।


सैन्य ऑपरेशन पूरा हुआ

अमेरिकी कमांड के अनुसार, यह सैन्य ऑपरेशन अब पूरा हो चुका है, लेकिन खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सेना को उच्च सतर्कता पर रखा गया है ताकि ईरान की किसी भी संभावित प्रतिक्रिया का तुरंत जवाब दिया जा सके।