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ईरान में अलीरेजा अराफी बने नए अंतरिम सुप्रीम लीडर

ईरान में अलीरेजा अराफी को नए अंतरिम सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त किया गया है, जो खामेनेई की मृत्यु के बाद की स्थिति को संभालेंगे। उनका चयन संविधान के आर्टिकल 111 के तहत किया गया है, जिसमें राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और गार्जियन काउंसिल के सदस्य शामिल हैं। अराफी की भूमिका युद्ध के हालात में विचारधारा की निरंतरता और शासन की स्थिरता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण होगी। जानें उनके बारे में और उनकी जिम्मेदारियों के बारे में अधिक जानकारी।
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ईरान में अलीरेजा अराफी बने नए अंतरिम सुप्रीम लीडर

ईरान का नया नेतृत्व

नई दिल्ली - अमेरिका-इजराइल हमलों के बाद ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के बाद, अलीरेजा अराफी को देश का नया अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है।


अलीरेजा अराफी को लीडरशिप काउंसिल का ज्यूरिस्ट सदस्य बनाया गया है, जिसका अर्थ है कि वे तब तक सुप्रीम लीडर की भूमिका निभाएंगे जब तक असेंबली नए लीडर का चुनाव नहीं कर लेती।


अराफी का जन्म 1959 में याज्द प्रांत के मेयबोद शहर में हुआ था। वे एक शिया धर्मगुरु हैं और वर्तमान में गार्जियन काउंसिल, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य और बसिज के प्रमुख हैं। इससे पहले, वे अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के चेयरमैन, कोम के शुक्रवार की नमाज के इमाम और ईरान के सेमिनरी के प्रमुख रह चुके हैं। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स बाद में स्थायी सुप्रीम लीडर का चुनाव करेगी।


अराफी का चयन क्यों हुआ?
अराफी को ईरान का नया अंतरिम सुप्रीम लीडर इसलिए चुना गया क्योंकि खामेनेई की हत्या के बाद संविधान के आर्टिकल 111 के तहत अस्थायी लीडरशिप काउंसिल का गठन किया गया था। इस 3 सदस्यीय परिषद में राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और गार्जियन काउंसिल के ज्यूरिस्ट सदस्य शामिल हैं। अराफी को ज्यूरिस्ट सदस्य के रूप में चुना गया, जिससे वे अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। खामनेई के करीबी विश्वासपात्र होने के नाते, उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है ताकि युद्ध के हालात में विचारधारा की निरंतरता, प्रशासनिक क्षमता और शासन की स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।