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ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन: रजा पहलवी का जनता से आह्वान

ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े सरकार विरोधी आंदोलन में बदल चुके हैं। महंगाई और मुद्रा के गिरते मूल्य के कारण लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन प्रदर्शनों में 36 लोगों की जान जा चुकी है। निर्वासित राजकुमार रजा पहलवी ने जनता से खुलकर कार्रवाई का आह्वान किया है। जानें इस आंदोलन की शुरुआत, रजा पहलवी का संदेश और सरकार की प्रतिक्रिया के बारे में।
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ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन: रजा पहलवी का जनता से आह्वान

ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों की कहानी


नई दिल्ली: ईरान में आर्थिक समस्याओं के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन अब एक बड़े सरकार विरोधी आंदोलन में बदल चुके हैं। महंगाई, मुद्रा के गिरते मूल्य और दैनिक जीवन की कठिनाइयों के चलते लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन प्रदर्शनों को दबाने के प्रयास में अब तक 36 लोगों की जान जा चुकी है।


सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया है और बल प्रयोग किया है। इस बीच, निर्वासित ईरानी राजकुमार रजा पहलवी ने पहली बार जनता से खुलकर कार्रवाई करने का आह्वान किया है।


प्रदर्शनों की शुरुआत

विरोध की शुरुआत 28 दिसंबर को तेहरान के मुख्य बाजार से हुई, जहां व्यापारियों ने अपनी दुकानें बंद कर हड़ताल की। ईरानी रियाल का मूल्य डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद यह प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए, विशेषकर पश्चिमी क्षेत्रों में जहां कुर्द और लोर समुदाय की संख्या अधिक है।


अब्दानान शहर में हजारों लोग सड़कों पर उतरे और नारेबाजी की। सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में लोग 'जाविद शाह' और खामेनेई के खिलाफ नारे लगाते नजर आए। यह 2022-23 के महसा अमिनी आंदोलन के बाद का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है।


10 दिनों में हुई मौतें

मानवाधिकार संगठन एचआरएएनए के अनुसार, पिछले दस दिनों में 34 प्रदर्शनकारी और दो सुरक्षा कर्मी मारे गए हैं, जिससे कुल मौतों की संख्या 36 हो गई है। तेहरान में सुरक्षा बलों ने आंसू गैस का इस्तेमाल कर भीड़ को तितर-बितर किया। कई स्थानों पर गिरफ्तारियां भी हुई हैं। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया भी दमन में शामिल हैं।


रजा पहलवी का संदेश

ईरान के अंतिम शाह के बेटे रजा पहलवी, जो लंबे समय से निर्वासन में हैं, ने इन प्रदर्शनों के दौरान पहली बार सीधे जनता को संदेश दिया। उन्होंने लोगों से 8 और 9 जनवरी की रात ठीक 8 बजे नारे लगाने की अपील की, चाहे वे घर में हों या सड़क पर।


उन्होंने कहा कि जनता की प्रतिक्रिया के आधार पर वे आगे के कदमों की घोषणा करेंगे। उनके समर्थक 'पहलवी वापस आएंगे' जैसे नारे लगा रहे हैं, जो 1979 की क्रांति के खिलाफ एक संकेत है।


सरकार की प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने आर्थिक सुधारों का वादा किया है। सब्सिडी व्यवस्था में बदलाव कर लोगों को सीधे पैसे देने की योजना 10 जनवरी से लागू होगी। केंद्रीय बैंक के गवर्नर को भी बदल दिया गया है। सरकार का कहना है कि ये कदम मुद्रा को स्थिर करेंगे और क्रय शक्ति को बढ़ाएंगे। हालांकि, न्यायपालिका ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्ती जारी रहेगी।