ईरान में खामेनेई के खिलाफ बढ़ते विरोध: क्या है स्थिति?
सियासी भूचाल की आहट
नई दिल्ली: ईरान में राजनीतिक अस्थिरता के संकेत फिर से उभरने लगे हैं। सड़कों पर लोग सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और प्रदर्शनकारी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय दबाव भी लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे तेहरान की चिंताएं और बढ़ गई हैं।
अमेरिका की कार्रवाई से बढ़ी चिंता
हाल ही में अमेरिका की एक कार्रवाई ने ईरान में बेचैनी को और बढ़ा दिया है। जब अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनके देश से गिरफ्तार किया, तो इसने ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान में खतरे की घंटी बजा दी। अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या ईरान का शीर्ष नेतृत्व भी इस खतरे का शिकार हो सकता है।
विरोध और विदेशी दबाव के बीच खामेनेई की योजना
बढ़ते विरोध और विदेशी दबाव के बीच आशंका
जब देश में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में हस्तक्षेप की चेतावनी दी है, तब ब्रिटिश मीडिया में एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, यदि स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो जाती है या सुरक्षा बलों का समर्थन कमजोर पड़ता है, तो 86 वर्षीय खामेनेई रूस की राजधानी मॉस्को भागने की योजना बना सकते हैं।
सुप्रीम लीडर की सुरक्षा की जिम्मेदारी
संकट के साए में सुप्रीम लीडर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यदि ईरान की सेना सरकार विरोधी प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में असफल रहती है या सुरक्षा बलों में फूट पड़ती है, तो खामेनेई अपने करीबी 20 सहयोगियों और परिवार के सदस्यों के साथ देश छोड़ सकते हैं।
खामेनेई की सुरक्षा का तंत्र
खामेनेई की सुरक्षा का जिम्मा किसके पास?
अयातुल्ला अली खामेनेई की सुरक्षा किसी सामान्य सैन्य बल के हाथ में नहीं है। उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी वली-ए-अम्र फोर्स संभालती है, जो ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की एक विशेष और रहस्यमयी यूनिट मानी जाती है।
वली-ए-अम्र की विशेषताएँ
सिर्फ बॉडीगार्ड नहीं, हाई-लेवल एक्सपर्ट
वली-ए-अम्र के जवान केवल हथियार चलाने तक सीमित नहीं हैं। इन्हें साइबर वॉरफेयर, काउंटर इंटेलिजेंस, और आंतरिक खतरों की पहचान करने जैसी उन्नत ट्रेनिंग दी जाती है। चाहे खतरा बाहर से हो या भीतर से, यह फोर्स हमेशा सतर्क रहती है।
नेतृत्व में बदलाव
नेतृत्व में बदलाव और रहस्य
ईरानी सरकारी एजेंसी के अनुसार, 2022 में इस यूनिट के नेतृत्व में बड़ा बदलाव हुआ। ब्रिगेडियर जनरल हसन मशरुईफर को नया कमांडर नियुक्त किया गया। पूर्व कमांडर इब्राहीम जब्बारी को सम्मानपूर्वक पद से हटा दिया गया। इस फोर्स से जुड़ी अधिकांश जानकारियाँ आज भी पूरी तरह गोपनीय हैं।
ईरानी सत्ता की रीढ़
ईरानी सत्ता की असली रीढ़
विशेषज्ञों का मानना है कि वली-ए-अम्र केवल एक सुरक्षा दस्ते से कहीं अधिक है। यह ईरान की सत्ता की रीढ़ मानी जाती है। यदि खामेनेई के साथ कुछ होता है, तो सत्ता का संक्रमण तुरंत और नियंत्रित तरीके से संभालने की जिम्मेदारी भी इसी फोर्स पर होगी। यही कारण है कि तेहरान में घुसकर खामेनेई को अगुवा करना, चाहे अमेरिका ही क्यों न हो, कागजों पर जितना आसान लगता है, वास्तविकता में उतना ही कठिन है।
