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ईरान में जन आंदोलन: क्या है ट्रंप और खामेनेई के बीच का तनाव?

ईरान में चल रहे जन आंदोलन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर कार्रवाई की खबरें चिंता बढ़ा रही हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। इस बीच, भारत ने ईरान में अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो रहा है ईरान में।
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ईरान में जन आंदोलन: क्या है ट्रंप और खामेनेई के बीच का तनाव?

ईरान में जन आंदोलन का प्रभाव


नई दिल्ली: ईरान में चल रहे जन आंदोलन ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। महंगाई, मुद्रा के गिरते मूल्य और गंभीर आर्थिक संकट के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर कार्रवाई की खबरें दुनिया भर में चिंता पैदा कर रही हैं। विभिन्न मानवाधिकार संगठनों और मीडिया रिपोर्टों में मौतों और गिरफ्तारियों के आंकड़े सामने आ रहे हैं, जिससे स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है।


तेहरान और वॉशिंगटन के बीच तनाव

प्रदर्शनों के बीच तेहरान और वॉशिंगटन के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। ईरान ने सख्ती के संकेत दिए हैं, जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों ने तनाव को और बढ़ा दिया है। इंटरनेट बंदी, गोलीबारी और 'आतंकी' जैसे आरोपों के बीच देशभर में उबाल बना हुआ है।


मौतों और गिरफ्तारियों की संख्या

ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स के अनुसार, अब तक कम से कम 62 लोगों की जान जा चुकी है और 2,300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। टाइम मैग्जीन की रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई जा रही है। एक डॉक्टर के अनुसार, छह अस्पतालों में कम से कम 217 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई है। सरकारी मीडिया प्रदर्शनकारियों को 'आतंकी' और 'तोड़फोड़ करने वाले' बताकर कार्रवाई का माहौल बना रहा है।


खामेनेई का ट्रंप पर हमला

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रंप पर हमला करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के 'हाथ ईरानियों के खून से सने हैं।' यह बयान इजरायल के साथ जून में हुए युद्ध और उसमें अमेरिकी समर्थन के संदर्भ में दिया गया। खामेनेई ने प्रदर्शनकारियों पर भी निशाना साधा, जबकि उनके समर्थकों ने 'डेथ टू अमेरिका' के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि इस्लामिक गणराज्य खून देकर बना है और वह दबाव में नहीं झुकेगा।


ट्रंप की नई चेतावनी

ट्रंप ने हालात को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान 'बहुत बड़ी मुसीबत' में है। उन्होंने कहा कि ईरान की सरकार के लिए बेहतर होगा कि वह प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाना बंद करे, वरना अमेरिका भी जवाबी कार्रवाई करेगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब जमीनी सैन्य कार्रवाई नहीं है, लेकिन ईरान को 'जहां दर्द होगा, वहीं चोट' दी जाएगी।


इंटरनेट शटडाउन का प्रभाव

प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरान ने देशव्यापी इंटरनेट शटडाउन लागू कर दिया है। नेटब्लॉक्स और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन बताया है। एमनेस्टी के अनुसार, इंटरनेट बंद करने का मकसद हिंसा और मौतों की असली तस्वीर दुनिया से छिपाना है। नॉर्वे स्थित एनजीओ 'ईरान ह्यूमन राइट्स' ने कहा है कि मरने वालों में कम से कम नौ बच्चे भी शामिल हैं।


भारत की स्थिति पर नजर

इस बीच, भारत ने स्थिति पर करीबी नजर रखने की बात कही है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, ईरान में लगभग 10,000 भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनकी सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की गई है। तेहरान समेत कई बड़े शहरों में हजारों लोग 'तानाशाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाते हुए सड़कों पर उतर आए हैं। ये प्रदर्शन 2022-23 में महसा अमीनी की मौत के बाद हुए आंदोलनों के बाद सबसे बड़े माने जा रहे हैं और 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सत्ता के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखे जा रहे हैं।