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ईरान में नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति: मोजतबा खामेनेई का इजरायल पर मिसाइल हमला

ईरान ने अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई को नए सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त किया है, जिसके तुरंत बाद इजरायल पर मिसाइल हमले की पहली लहर छोड़ी गई। यह घटनाक्रम अमेरिका और इजरायल के विरोध के बीच हुआ है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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ईरान में नए सुप्रीम लीडर की नियुक्ति: मोजतबा खामेनेई का इजरायल पर मिसाइल हमला

नई नेतृत्व की शुरुआत


नई दिल्ली: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे, अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई, को नए सुप्रीम लीडर के रूप में नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद, ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमलों की पहली लहर शुरू की, जिससे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब अमेरिका और इजरायल पहले से ही नए लीडर की नियुक्ति के खिलाफ कड़ा रुख अपनाए हुए थे।


मिसाइल हमले की शुरुआत

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के राज्य प्रसारक आईआरआईबी ने बताया कि अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के नेतृत्व में कब्जे वाले क्षेत्रों पर मिसाइलों की पहली लहर दागी गई है। इसके साथ ही हमले की तस्वीरें भी साझा की गईं, जो क्षेत्रीय संघर्ष में एक नए मोड़ का संकेत देती हैं।


इजरायल की चेतावनी

कुछ समय पहले, इजरायली सेना ने फारसी में एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से चेतावनी दी थी कि अली खामेनेई के किसी भी संभावित उत्तराधिकारी का पीछा किया जाएगा। इजरायल ने स्पष्ट किया था कि जो भी व्यक्ति नए सुप्रीम लीडर बनने की कोशिश करेगा या नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल होगा, उसे निशाना बनाया जाएगा। यह बयान उस समय आया जब ईरान की धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स अगले सर्वोच्च नेता के चयन के लिए बैठक करने वाली थी।


अमेरिका का यूरेनियम पर ध्यान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कथित तौर पर ईरान के यूरेनियम को नियंत्रित करने के लिए एक विशेष सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में तीन राजनयिक अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि इस योजना के तहत अमेरिका ईरान में विशेष बलों को तैनात कर सकता है, जिनका मुख्य उद्देश्य बम-स्तर के समृद्ध यूरेनियम पर नियंत्रण हासिल करना होगा।


तीन सदस्यीय समिति का नियंत्रण

अयातुल्ला अली खामेनेई ने 37 वर्षों तक ईरान पर शासन किया और 28 फरवरी को तेहरान में अमेरिकी-इजरायली हमले में उनकी मृत्यु हो गई। उनके निधन के बाद, एक सप्ताह तक कोई नया नेता नहीं चुना जा सका, जिसके कारण देश की कमान एक तीन सदस्यीय समिति को सौंप दी गई थी। इस देरी से ईरान के कुछ समूहों में असंतोष बढ़ रहा था।


इन लोगों का मानना है कि नेतृत्व के नाम पर एक चेहरा होना आवश्यक है, खासकर युद्ध के हालात में सेना का मनोबल बनाए रखने के लिए ऐसा करना जरूरी है।