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ईरान में प्रदर्शनों पर ट्रंप का समर्थन: रूस ने दी कड़ी चेतावनी

ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन देने वाला बयान वैश्विक तनाव को बढ़ा रहा है। रूस ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है, यह कहते हुए कि ईरान की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। रूस का मानना है कि यदि अमेरिका ने सैन्य विकल्प अपनाया, तो इसका प्रभाव केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। जानें इस स्थिति का क्या असर हो सकता है और ट्रंप के बयान से वैश्विक स्तर पर क्या चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं।
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ईरान में प्रदर्शनों पर ट्रंप का समर्थन: रूस ने दी कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली में बढ़ता तनाव


नई दिल्ली : ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन देने वाला बयान वैश्विक तनाव को बढ़ा रहा है। ट्रंप के इस बयान के बाद, रूस ने अमेरिका के खिलाफ खुलकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। रूस ने न केवल अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है, बल्कि ईरान पर किसी भी नए हमले की धमकी को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। मॉस्को का कहना है कि वॉशिंगटन की यह नीति ईरान की संप्रभुता में सीधा हस्तक्षेप है, जिससे मध्य पूर्व की स्थिति और भी गंभीर हो सकती है।


रूस की आलोचना

रूस ने अमेरिका पर लगाया दखलअंदाजी का आरोप
रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका की आलोचना करते हुए कहा कि ईरान की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप करना अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति पहले से ही संवेदनशील है, और किसी भी प्रकार की सैन्य धमकी या उकसावे से पूरे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। रूस ने स्पष्ट किया कि ईरान पर नए हमले की बात न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि इससे वैश्विक सुरक्षा को भी गंभीर खतरा हो सकता है।


जून 2025 की घटनाओं का संदर्भ

असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा...
रूस के बयान में जून 2025 की घटनाओं का उल्लेख किया गया है। मंत्रालय ने कहा कि जो ताकतें बाहरी प्रभावों के जरिए ईरान में अस्थिरता फैलाने की कोशिश कर रही हैं, उन्हें इसके गंभीर परिणामों को समझना चाहिए। बयान में यह भी कहा गया कि ऐसे प्रयासों का प्रभाव केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे मध्य पूर्व और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे को प्रभावित कर सकता है।


ईरान और इजरायल के बीच युद्ध

ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक चला युद्ध
जून 2025 में ईरान और इजरायल के बीच 12 दिनों तक एक भीषण युद्ध हुआ था, जिसमें अमेरिका ने इजरायल का समर्थन किया था। इस संघर्ष में ईरान को भारी सैन्य और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा, लेकिन ईरानी नेतृत्व ने इसे अपनी दृढ़ता के रूप में पेश किया। उस समय ईरान में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई के प्रति जनता का भरोसा कुछ हद तक मजबूत हुआ था।


जनता का विरोध

दिसंबर में बदला माहौल, सड़कों पर उतरी जनता
हालांकि, यह भरोसा ज्यादा समय तक नहीं टिक सका। दिसंबर में महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक दमन के कारण जनता सड़कों पर उतर आई। देखते ही देखते, ईरान में विरोध प्रदर्शन राष्ट्रव्यापी हो गए। सरकार ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए कठोर कदम उठाए, जिससे हालात और बिगड़ गए। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक कम से कम 2,000 लोगों की मौत हो चुकी है।


ट्रंप का समर्थन

प्रदर्शनकारियों से विरोध जारी रखने की अपील
इन हालात के बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रदर्शनकारियों से विरोध जारी रखने की अपील की और कहा कि "मदद आ रही है।" ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द कर दी हैं। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस रूप में होगी। इस बयान को ईरान और उसके सहयोगी देश अमेरिका की सीधी दखलअंदाजी के रूप में देख रहे हैं।


वैश्विक चिंता

वैश्विक चिंता और कूटनीतिक चुनौती
रूस का मानना है कि अमेरिका की इस नीति से हालात और बिगड़ सकते हैं। मॉस्को ने चेतावनी दी है कि यदि सैन्य विकल्प अपनाया गया, तो इसका प्रभाव केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। ऐसे समय में कूटनीति ही एकमात्र समाधान है, लेकिन ट्रंप के बयानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंता और अनिश्चितता पैदा कर दी है।