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ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई का कड़ा संदेश

ईरान में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ जनता ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने दंगाइयों को चेतावनी दी है और विदेशी हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। देश के 90 से अधिक शहरों में चल रहे इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 10 लोगों की मौत हो चुकी है। जानें इस स्थिति का पूरा विवरण और खामेनेई का कड़ा संदेश।
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ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच खामेनेई का कड़ा संदेश

ईरान में विरोध प्रदर्शनों की लहर

नई दिल्ली: ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट के खिलाफ जनता ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने पहली बार सार्वजनिक रूप से दंगाइयों को चेतावनी दी है और विदेशी शक्तियों पर भी आरोप लगाया है। देश के 90 से अधिक शहरों में चल रहे इन प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 10 लोगों की जान जा चुकी है। खामेनेई का यह बयान ईरान के राजनीतिक और सामाजिक परिदृश्य पर गहरा असर डाल रहा है.


खामेनेई का स्पष्ट संदेश

अयातुल्ला खामेनेई ने कहा कि प्रदर्शनकारी और दंगाई अलग हैं। उन्होंने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की मांगों को सुना जा सकता है, लेकिन दंगाइयों से बातचीत का कोई लाभ नहीं है। खामेनेई ने चेतावनी दी कि दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी होगी और इस मामले में सख्त कदम उठाए जाएंगे.


विरोध प्रदर्शनों की स्थिति

पिछले एक हफ्ते से ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 10 लोग हिंसक झड़पों में मारे जा चुके हैं। ये प्रदर्शन देश की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, मुद्रा रियाल के गिरते मूल्य और बढ़ती महंगाई के खिलाफ शुरू हुए थे। धीरे-धीरे सरकार विरोधी नारे भी सुनाई देने लगे हैं, और 90 से अधिक शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए हैं.


विदेशी हस्तक्षेप का आरोप

खामेनेई ने अमेरिकी और इजरायली हस्तक्षेप का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग विदेशी सहायता या धन के माध्यम से सरकार और इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ माहौल बना रहे हैं। खामेनेई ने इसे गंभीर मामला बताते हुए चेतावनी दी कि दुश्मनों की मंशा विफल होगी.


अमेरिका का दबाव और ईरान की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान प्रदर्शनकारियों को कुचलता है, तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। ईरान ने इसे गैरकानूनी और अस्वीकार्य बताया है। संयुक्त राष्ट्र में ईरानी राजदूत ने ट्रंप की धमकियों की निंदा की, जबकि सुरक्षा परिषद के सचिव ने क्षेत्रीय अराजकता की आशंका जताई है.


2022 के बाद के सबसे बड़े प्रदर्शन

वर्तमान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को 2022 में महसा अमीनी के मामले के बाद सबसे बड़े माना जा रहा है। उस समय हिजाब विवाद में गिरफ्तारी और उनकी मौत के बाद देशभर में आंदोलन फैला था। मौजूदा प्रदर्शन अभी उतने व्यापक नहीं हैं, लेकिन यह सरकार के लिए एक गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं.