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ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच स्थिति गंभीर

ईरान में नए साल की शुरुआत के साथ ही हालात बिगड़ते जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है, और कई लोगों की मौत हो चुकी है। महंगाई अपने चरम पर है, जिससे लोग सड़कों पर उतर आए हैं। रजा पहलवी का समर्थन भी बढ़ रहा है। जानें इस गंभीर स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
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ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच स्थिति गंभीर

नई दिल्ली: ईरान में हालात बिगड़ते जा रहे हैं


नए साल की शुरुआत के साथ ही ईरान में स्थिति तेजी से बिगड़ती जा रही है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ चल रहे विरोध अब हिंसक हो गए हैं। आर्थिक संकट, महंगाई में वृद्धि और मुद्रा के गिरते मूल्य के कारण लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इन प्रदर्शनों में कई प्रदर्शनकारियों की मौत की खबरें आई हैं, साथ ही सुरक्षा बलों के एक सदस्य की भी जान गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह पिछले तीन वर्षों में ईरान का सबसे बड़ा जन आंदोलन माना जा रहा है।


प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें

प्रारंभ में ये प्रदर्शन केवल राजधानी तेहरान और कुछ बड़े शहरों तक सीमित थे, लेकिन अब यह आंदोलन ग्रामीण क्षेत्रों में भी फैल चुका है। पश्चिमी ईरान के लोरदेगन, कुहदश्त और इस्फहान प्रांतों से मौतों की पुष्टि हुई है। ईरानी मीडिया और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच सीधी और हिंसक झड़पें हुई हैं, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।


रजा पहलवी का समर्थन

तेहरान के विश्वविद्यालयों के छात्र भी बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं। उन्होंने 'तानाशाह मुर्दाबाद' जैसे नारे लगाए और 1979 की इस्लामिक क्रांति में सत्ता से हटाए गए शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी के समर्थन में भी नारेबाजी की। अमेरिका में निर्वासित रजा पहलवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रदर्शनकारियों के समर्थन में एक संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि वे ईरानी जनता के साथ खड़े हैं और यह लड़ाई न्याय के लिए है। उनका कहना है कि जब तक मौजूदा शासन बना रहेगा, तब तक देश की आर्थिक स्थिति और खराब होती जाएगी।


महंगाई की चरम सीमा

ईरान में महंगाई अपने चरम पर पहुंच चुकी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह आर्थिक संकट सुप्रीम लीडर खामेनेई के कारण उत्पन्न हुआ है। रियाल अब डॉलर के मुकाबले काफी कमजोर हो चुका है, और लोग महंगाई कम करने की मांग कर रहे हैं। 2022 में महसा अमीनी आंदोलन के बाद से प्रदर्शन धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हैं, और कई दुकानदारों ने भी अपनी दुकानें बंद कर दी हैं।


प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महंगाई दर 42 प्रतिशत से भी अधिक हो चुकी है, जिससे उनकी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। वे 'डरो नहीं, हम सब साथ हैं', 'तानाशाह मुर्दाबाद' और 'डेथ टू डिक्टेटर' जैसे नारे लगा रहे हैं। कुछ लोग ईरान के पूर्व शासक रजा शाह के समर्थन में भी उतरे हैं।


प्रदर्शन समाप्त करने की कोशिशें

प्रदर्शन समाप्त करने के लिए कई स्थानों पर बल का प्रयोग किया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ शहरों में गोलीबारी और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों का उत्साह कम नहीं हुआ है। सभी प्रदर्शनकारी अपने स्थान पर डटे हुए हैं।


हाल ही में छात्र नेता सरीरा करीमी को हिरासत में लिया गया है, और मौलानाओं द्वारा भी प्रदर्शनकारियों को समर्थन मिल रहा है। हालांकि, कुछ लोग इसे गलत मानते हैं, उनका कहना है कि इससे देश के अन्य नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में ये प्रदर्शन और बढ़ते हैं या लोगों का गुस्सा थम जाएगा।