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ईरान में मुजाहिद्दीन-ए-खल्क का साहसिक हमला: क्या है इसके पीछे की कहानी?

तेहरान में मुजाहिद्दीन-ए-खल्क द्वारा किए गए एक साहसिक हमले ने ईरान की सुरक्षा स्थिति को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इस संघर्ष में आईआरजीसी और विपक्षी संगठन के बीच हुई मुठभेड़ ने जानमाल के नुकसान की खबरें दी हैं। एमईके ने इसे अपनी रणनीतिक सफलता माना है, जबकि सरकार इसे विफलता बताती है। जानें इस घटना के पीछे की कहानी और इसके संभावित अंतरराष्ट्रीय प्रभाव।
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ईरान में मुजाहिद्दीन-ए-खल्क का साहसिक हमला: क्या है इसके पीछे की कहानी?

तेहरान में हिंसक संघर्ष की शुरुआत


नई दिल्ली: ईरान के राजनीतिक क्षेत्र में चल रहा संघर्ष अब एक गंभीर और हिंसक मोड़ पर पहुँच चुका है। सोमवार को तेहरान के मोताहारी कॉम्प्लेक्स के निकट ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) और विपक्षी समूह मुजाहिद्दीन-ए-खल्क (एमईके) के बीच तीव्र गोलीबारी हुई। यह टकराव तब हुआ जब विपक्षी गुट ने अयातुल्ला खामेनेई के मुख्यालय में घुसने का प्रयास किया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया और स्थानीय समाचार स्रोतों ने इस संघर्ष की पुष्टि की है, जो सुरक्षा स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।


सुरक्षित परिसर में घुसपैठ का प्रयास

तेहरान का मोताहारी कॉम्प्लेक्स ईरान की प्रशासनिक और धार्मिक शक्ति का केंद्र है। यहाँ सुप्रीम लीडर खामेनेई का मुख्यालय, इंटेलिजेंस मंत्रालय, न्यायपालिका और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय स्थित हैं। एमईके के लड़ाकों ने इस अभेद्य किले में घुसने का साहसिक प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार, यह घुसपैठ सुबह की नमाज के समय शुरू हुई, जिसने सुरक्षा अधिकारियों को चौंका दिया। चश्मदीदों ने कॉम्प्लेक्स के आसपास भारी गोलाबारी और धमाकों की आवाजें सुनीं, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई।


मुठभेड़ में जानमाल का नुकसान

इस भीषण मुठभेड़ के बाद, आईआरजीसी ने दावा किया है कि उन्होंने मुजाहिद्दीन-ए-खल्क के लगभग 100 लड़ाकों को मार गिराया है। दूसरी ओर, एमईके का कहना है कि उनके 100 से अधिक जांबाज शहीद हुए हैं या उन्हें गिरफ्तार किया गया है। घटनास्थल पर एम्बुलेंसों की निरंतर आवाजाही ने यह स्पष्ट कर दिया कि संघर्ष में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। एमईके का दावा है कि मृतकों में सरकारी सुरक्षाकर्मी और समर्थक भी शामिल हैं।


खतरनाक ऑपरेशन का नाम

विपक्षी संगठन ने इस सैन्य कार्रवाई को 'खतरनाक और मुश्किल ऑपरेशन' का नाम दिया है। हिज़्बुल्लाह से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों ने इसे ईरान में एमईके द्वारा किया गया सबसे जोखिम भरा हमला बताया है। अल-अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, यह ऑपरेशन विदेशी खुफिया एजेंसियों की मदद से सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध किया गया था। हालांकि, सरकार ने दावा किया है कि इस साजिश को प्रारंभिक चरण में ही नाकाम कर दिया गया। एमईके के अनुसार, उनके 150 लड़ाके सुरक्षित लौटे हैं।


अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामला उठता

मुजाहिद्दीन-ए-खल्क ने मंगलवार को घोषणा की कि उन्होंने हिरासत में लिए गए 16 सदस्यों की सूची संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत को भेज दी है। संगठन अब अन्य लापता और घायल लड़ाकों के नाम अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं को सौंपने की योजना बना रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर सरकार पर दबाव डाला जा सके। उनका आरोप है कि हिरासत में लिए गए लड़ाकों के साथ अमानवीय व्यवहार हो सकता है। ईरान की सरकार इन दावों को खारिज करते हुए इस संगठन को आतंकवादी मानती है।


एमईके की रणनीतिक सफलता

ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम ने एमईके की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह संगठन केवल विदेशी शक्तियों के लिए एक मोहरा है। अयातुल्ला खामेनेई के बेटे मोजतबा के घर और कार्यालय के निकट हुई इस लड़ाई ने सुरक्षा घेरे की गंभीर कमजोरियों को उजागर किया है। जबकि सरकार इसे विफल बता रही है, एमईके इसे अपनी बड़ी रणनीतिक सफलता मानता है। यह घटना स्पष्ट करती है कि ईरान में सत्ता और विपक्ष के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।