ईरान में राष्ट्रपति का इस्तीफा: क्या है IRGC का बढ़ता प्रभाव?
ईरान की राजनीति में नया विवाद
नई दिल्ली: ईरान की राजनीतिक स्थिति में एक नया विवाद उत्पन्न हुआ है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सुप्रीम लीडर को अपना इस्तीफा सौंपा है। उन्होंने सरकार के अधिकारों में कमी और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बढ़ते प्रभाव पर चिंता व्यक्त की है। हालांकि, ईरानी सरकार और राष्ट्रपति कार्यालय ने इन दावों को पूरी तरह से गलत और भ्रामक बताया है।
राजनीतिक भूचाल का कारण
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने रविवार को एक पत्र में कहा कि देश के महत्वपूर्ण निर्णयों में राष्ट्रपति और सरकार की भूमिका लगातार घट रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि IRGC के कट्टरपंथी गुट महत्वपूर्ण सरकारी मामलों पर नियंत्रण स्थापित कर चुके हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस स्थिति में सरकार चलाना और संवैधानिक जिम्मेदारियों का पालन करना कठिन हो गया है, जिसके कारण उन्होंने इस्तीफे की इच्छा व्यक्त की है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि सुप्रीम लीडर ने इस मामले में कोई निर्णय लिया है या नहीं।
राष्ट्रपति कार्यालय का खंडन
इस्तीफे की खबर के बाद, राष्ट्रपति कार्यालय ने तुरंत इसका खंडन किया। राष्ट्रपति कार्यालय के संचार और सूचना विभाग के उप-प्रमुख सैयद मेहदी तबाताबेई ने कहा कि यह खबर एक विदेशी नेटवर्क द्वारा फैलायी गई अफवाह है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग जानबूझकर देश में भ्रम और अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियान अपने पद पर बने हुए हैं और अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं।
IRGC की भूमिका पर चर्चा
इस विवाद के बाद ईरान में IRGC की भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। IRGC को देश की सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में से एक माना जाता है और इसका राजनीति और सुरक्षा मामलों में महत्वपूर्ण प्रभाव है। रिपोर्टों में कहा गया है कि राष्ट्रपति ने इसी बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों की पुष्टि नहीं की है।
सरकारी सूत्रों का खंडन
IRGC से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने भी सरकारी सूत्रों के हवाले से इस्तीफे की खबर को गलत बताया है। एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति पेजेश्कियान सामान्य रूप से अपने सभी सरकारी कार्यों का संचालन कर रहे हैं। हालांकि, इन खबरों ने ईरान की राजनीति में हलचल जरूर पैदा कर दी है और सत्ता के शीर्ष स्तर पर मतभेदों की चर्चाएं बढ़ गई हैं।
