Newzfatafatlogo

ईरान में विरोध प्रदर्शनों की लहर: क्या सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है देश?

ईरान में हाल के दिनों में सत्ता के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। आर्थिक संकट और महंगाई ने लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। प्रदर्शन अब 21 प्रांतों में फैल चुके हैं, जिसमें हजारों लोग शामिल हैं। सुरक्षा बलों की कार्रवाई और छात्र नेताओं की गिरफ्तारी ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। जानें इस आंदोलन के पीछे के कारण और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
 | 
ईरान में विरोध प्रदर्शनों की लहर: क्या सत्ता परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है देश?

विरोध प्रदर्शनों का उभार


नई दिल्ली: ईरान में सत्ता के खिलाफ उठी आवाज़ें अब और भी तेज़ हो गई हैं। बुधवार को लगातार चौथे दिन देशभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें हजारों लोग सड़कों पर उतरे और सत्ता परिवर्तन की मांग की। कई शहरों में रैलियां आयोजित की गईं और सुप्रीम लीडर के खिलाफ नारेबाज़ी की गई, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।


विरोध का विस्तार

इन प्रदर्शनों को हाल के वर्षों में ईरान का सबसे बड़ा जन आंदोलन माना जा रहा है। आर्थिक संकट, रिकॉर्ड महंगाई और गिरती मुद्रा ने आम जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद यह सबसे बड़ा उभार है, जो अब चौथे दिन भी जारी है।


21 प्रांतों में फैला विरोध


इस्फहान, हमादान, बाबोल, देहलोरन, बाघमलेक और पियान जैसे कई शहरों में प्रदर्शनकारियों ने रैलियां निकालीं। उन्होंने सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए, निर्वासित राजकुमार रज़ा पहलवी के समर्थन में आवाज़ उठाई और पिछले आंदोलनों में मारे गए लोगों को याद किया। यह विरोध अब ईरान के 21 प्रांतों में फैल चुका है।


आंदोलन की जड़ें

आर्थिक संकट का प्रभाव


ईरान में दिसंबर 2025 से शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन गहराते आर्थिक संकट का परिणाम माने जा रहे हैं। ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच चुका है। महंगाई दर लगभग 42 फीसदी तक पहुंचने से आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर बुरा असर पड़ा है। 28 दिसंबर को तेहरान के ग्रैंड बाजार से विरोध की चिंगारी भड़की, जब दुकानदारों ने हड़ताल की।


प्रदर्शनकारियों के नारे

सड़कों पर गूंजते नारे


इस्फहान में रात के समय प्रदर्शनकारियों ने 'डरो मत, हम सब साथ हैं', 'तानाशाह मुर्दाबाद' और 'डेथ टू डिक्टेटर' जैसे नारे लगाए। वहीं, देहलोरन और बाघमलेक में राजशाही के समर्थन में भी नारे सुनाई दिए। कई प्रदर्शनकारियों ने ईरान के पूर्व शासक रज़ा शाह पहलवी के समर्थन में भी आवाज़ उठाई।


सुरक्षा बलों की कार्रवाई

सुरक्षा बलों का सख्त रुख


प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने कई इलाकों में बल प्रयोग किया। नाहवंद, असदाबाद और हमादान जैसे शहरों में गोलीबारी और आंसू गैस के इस्तेमाल की खबरें आई हैं। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारी सड़कों पर डटे रहे और विरोध जारी रखा।


छात्र नेताओं पर कार्रवाई

छात्र नेताओं की गिरफ्तारी


तेहरान में तेहरान यूनिवर्सिटी की स्टूडेंट लीडर सरीरा करीमी को उनके घर पर छापे के बाद हिरासत में लिया गया है। फिलहाल उनके ठिकाने की कोई जानकारी नहीं मिल पाई है, जिससे छात्रों और मानवाधिकार संगठनों में चिंता बढ़ गई है।


धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय समर्थन

समर्थन की लहर


इस आंदोलन को अब धार्मिक नेताओं का भी समर्थन मिलने लगा है। सुन्नी मौलाना मोलावी अब्दोलहामिद ने कहा कि खराब जीवन स्तर और राजनीतिक गतिरोध इस विद्रोह की मुख्य वजह हैं। मशहूर फिल्ममेकर जाफर पनाही ने इसे इतिहास को आगे बढ़ाने वाला विद्रोह बताया और कहा कि साझा दर्द अब सड़कों पर एक चीख में बदल गया है।


पश्चिमी देशों के नेता भी लगातार प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दे रहे हैं। अमेरिकी सीनेटर रिक स्कॉट ने कहा कि उन्हें यह देखकर हौसला मिला कि ईरानी लोग अपनी तानाशाही को खत्म करने की मांग कर रहे हैं और उन्होंने लोगों से बुरी सरकार के खिलाफ संघर्ष जारी रखने की अपील की।