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ईरान में सत्ता संतुलन में बदलाव: क्या बढ़ेगा अमेरिका के साथ तनाव?

ईरान में हाल के दिनों में सत्ता संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपनी पकड़ मजबूत की है। मेजर जनरल अहमद वाहिदी के नेतृत्व में, IRGC ने न केवल सैन्य निर्णयों पर, बल्कि विदेश नीति पर भी प्रभाव डाला है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और अमेरिका के साथ बातचीत में रुकावट के चलते, विशेषज्ञों का मानना है कि एक नया संघर्ष शुरू हो सकता है। क्या ईरान में नरमपंथी ताकतों की आवाज दब जाएगी? जानिए इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में।
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ईरान में सत्ता संतुलन में बदलाव: क्या बढ़ेगा अमेरिका के साथ तनाव?

ईरान में सत्ता का नया समीकरण


नई दिल्ली: ईरान में राजनीतिक शक्ति का संतुलन हाल ही में महत्वपूर्ण रूप से बदल गया है। पिछले 48 घंटों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने न केवल सैन्य निर्णयों पर, बल्कि देश की विदेश नीति पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।


मेजर जनरल अहमद वाहिदी का उदय

अमेरिकी थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर और न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्टों के अनुसार, मेजर जनरल अहमद वाहिदी अब ईरान के सबसे प्रभावशाली नेता बनकर उभरे हैं। सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई की चुप्पी को इस बदलाव पर सहमति के रूप में देखा जा रहा है।


होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव

होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव, जहाजों की आवाजाही रुकी


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस शक्ति परिवर्तन का सबसे गंभीर प्रभाव स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में देखा जा रहा है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को खोलने के पक्षधर थे, लेकिन IRGC ने उनके निर्णय को पलट दिया। वाहिदी के आदेश पर ईरान की फास्ट अटैक बोट्स ने क्षेत्र को अवरुद्ध कर दिया है।


पिछले दो दिनों में कम से कम तीन जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिससे सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय जहाज फारस की खाड़ी में फंस गए हैं। समुद्री ट्रैकिंग डेटा भी यह दर्शाता है कि होर्मुज में नौकायन पूरी तरह से ठप हो चुका है। केवल ईरानी जहाज सीमित रूप से गुजर रहे हैं, लेकिन वे भी अमेरिकी नाकाबंदी वाली लाइन के करीब नहीं आ रहे।


कूटनीति पर IRGC का प्रभाव

ईरान में कूटनीति पर IRGC का कब्जा


इस बीच, पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत भी इस बदलाव का शिकार हो गई है। IRGC ने कूटनीतिक टीम में कट्टरपंथी नेता मोहम्मद बागेर जोलगाद्र को शामिल करने का प्रयास किया। संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ और अराघची ने इसका विरोध किया, लेकिन जोलगाद्र ने अराघची पर 'नरमी' बरतने का आरोप लगाते हुए शिकायत कर दी।


इसका परिणाम यह हुआ कि पूरी ईरानी डेलिगेशन को तेहरान वापस बुला लिया गया। थिंक टैंक के अनुसार, अब अमेरिका के साथ कोई सार्थक वार्ता लगभग असंभव हो गई है। मंगलवार (21 अप्रैल 2026) की डेडलाइन नजदीक है और सीजफायर की उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं।


संघर्ष की संभावना

क्या फिर से शुरू होगा नया संघर्ष?


गौरतलब है कि वाहिदी और उनके समर्थकों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अमेरिका की मांगें स्वीकार्य नहीं हैं। IRGC से जुड़े मीडिया ने बातचीत ठुकराने की पुष्टि की है। विश्लेषकों का मानना है कि इस सैन्य-कूटनीतिक कब्जे के बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का नया दौर शुरू हो सकता है।


ईरान में नरमपंथी ताकतों की आवाज दब गई है और 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' की सख्त नीति फिर से मजबूत होती दिख रही है। दुनिया अब इस बात का इंतजार कर रही है कि अगले कुछ दिनों में क्या निर्णय लिया जाएगा, शांति की कोशिश या बड़े संघर्ष की आशंका भी जताई जा रही है।