ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का बढ़ता संकट: अमेरिका की चिंता गहराई
अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय
नई दिल्ली: ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। अमेरिका ने हाल ही में आई रिपोर्टों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसमें कहा गया है कि ईरानी सरकार ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाने के लिए हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों और इराकी सशस्त्र समूहों को तैनात किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इसे ईरानी नागरिकों के प्रति एक "गंभीर विश्वासघात" बताया है, यह कहते हुए कि अरबों डॉलर खर्च किए गए प्रॉक्सी संगठनों का उपयोग अपने ही लोगों के खिलाफ करना बेहद चिंताजनक है।
विरोध प्रदर्शनों का विस्तार
तेहरान सहित कई शहरों में पिछले दो हफ्तों से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। हाल में जारी वीडियो फुटेज में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर इकट्ठा होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो में दिखने वाले सड़क संकेत, इमारतों की संरचना और अन्य दृश्य विवरण सैटेलाइट तस्वीरों से मेल खाते हैं, जिससे इनकी वास्तविकता की पुष्टि होती है, हालांकि इनकी सटीक तारीख की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई
प्रदर्शनों के दौरान ईरानी सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाई को तेज कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान के पास बहरेस्तान शहर से लगभग 100 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन्हें अधिकारी "सशस्त्र दंगाई" बता रहे हैं। सरकार का कहना है कि ये लोग हिंसा फैलाने का प्रयास कर रहे थे, जबकि मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह विरोध की आवाज को दबाने की कार्रवाई है।
इंटरनेट पर प्रतिबंध
ईरान में इंटरनेट सेवाओं और मोबाइल नेटवर्क पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे जमीनी हालात की सटीक जानकारी प्राप्त करना मुश्किल हो गया है। अमेरिका में स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक कम से कम 65 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,300 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। वहीं, ईरानी सरकारी मीडिया सुरक्षा बलों के नुकसान को उजागर कर स्थिति को नियंत्रण में बताने का प्रयास कर रहा है।
वैश्विक तनाव की स्थिति
इस बीच, दक्षिण अफ्रीका ने "विल फॉर पीस 2026" नामक एक सप्ताह तक चलने वाले नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत की है, जिसमें रूस, चीन और ईरान के युद्धपोत शामिल हैं। दक्षिण अफ्रीकी सरकार का कहना है कि यह अभ्यास शक्ति प्रदर्शन नहीं, बल्कि बढ़ते वैश्विक समुद्री तनाव के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रयास है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका ने हाल ही में प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप में एक रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर को जब्त किया था।
ईरानी नेतृत्व का कड़ा रुख
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के बीच रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने चेतावनी दी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और इस्लामी गणराज्य की रक्षा उनकी "रेड लाइन" है। सेना ने नागरिकों से अपील की है कि वे "दुश्मन की साजिशों" से सतर्क रहें।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्थिति को स्थिर बताते हुए कहा है कि प्रतिबंधों और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद देश में स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, जमीनी हालात और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टें इस दावे से भिन्न तस्वीर पेश कर रही हैं।
