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ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में मौतों की संख्या पर विवाद: क्या है सच्चाई?

ईरान में हालिया सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मौतों की संख्या को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ है। विपक्षी मीडिया ने 12,000 मौतों का दावा किया है, जबकि सरकारी आंकड़े 2,000 के करीब हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि कैसे ये आंकड़े एक-दूसरे से भिन्न हैं, और क्या ईरान के शीर्ष नेतृत्व की भूमिका इसमें शामिल है। रिपोर्ट में सुरक्षा बलों की सुनियोजित कार्रवाई और सूचना पर प्रतिबंधों का भी जिक्र है। क्या सच्चाई कभी सामने आएगी? जानने के लिए पूरा लेख पढ़ें।
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ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में मौतों की संख्या पर विवाद: क्या है सच्चाई?

ईरान में मौतों की संख्या पर विवाद


नई दिल्ली : हाल ही में ईरान में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान मौतों की संख्या को लेकर गंभीर विवाद उत्पन्न हुआ है। विपक्ष से जुड़ी मीडिया वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 12,000 लोगों की जान गई। इसे ईरान के इतिहास की सबसे बड़ी हिंसक घटना बताया गया है। हालांकि, यह आंकड़ा सरकारी रिपोर्टों और अन्य अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से काफी भिन्न है, जिससे सच्चाई पर सवाल उठ रहे हैं।


सरकारी आंकड़ों और स्वतंत्र रिपोर्टों में अंतर

सरकारी दावों और स्वतंत्र अनुमानों में बड़ा अंतर
रॉयटर्स को दिए गए एक बयान में, ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मौतों की संख्या लगभग 2,000 बताई। सरकारी पक्ष का कहना है कि हिंसा के लिए सुरक्षा बल नहीं, बल्कि 'आतंकवादी तत्व' जिम्मेदार थे। मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने सैकड़ों मौतों की पुष्टि की है, लेकिन स्वतंत्र जांच में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।


सुरक्षा बलों पर सुनियोजित कार्रवाई का आरोप

सुरक्षा बलों पर सुनियोजित कार्रवाई का आरोप
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक हिंसा 8 और 9 जनवरी की रात को हुई। इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) और बासिज बलों ने कई शहरों में एक साथ कार्रवाई की। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह हिंसा अचानक नहीं हुई, बल्कि पूर्व-निर्धारित और संगठित थी।


शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर आरोप

शीर्ष नेतृत्व की भूमिका पर गंभीर आरोप
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह ऑपरेशन ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के आदेश पर किया गया। दावा किया गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने जीवित गोलियों के इस्तेमाल की अनुमति दी थी, और इस फैसले की जानकारी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को थी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।


आंकड़ों की जांच प्रक्रिया

आंकड़े कहां से आए: रिपोर्ट की जांच प्रक्रिया
ईरान इंटरनेशनल का कहना है कि 12,000 मौतों का आंकड़ा सुरक्षा एजेंसियों के आंतरिक रिकॉर्ड पर आधारित है। वेबसाइट ने दावा किया कि यह जानकारी कई स्तरों पर सत्यापित की गई है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद और राष्ट्रपति कार्यालय से जुड़े सूत्र, IRGC के भीतर के लोग, प्रत्यक्षदर्शी बयान, चिकित्सा अधिकारियों की गवाही और विभिन्न शहरों के अस्पतालों से मिले आंकड़े शामिल हैं।


सूचना पर प्रतिबंध और देरी

सूचना ब्लैकआउट और देरी की वजह
वेबसाइट ने बताया कि रिपोर्ट के प्रकाशन में देरी इसलिए हुई क्योंकि देशभर में इंटरनेट बंदी और मीडिया पर रोक थी। पत्रकारों और गवाहों को धमकाया गया, जिससे जानकारी जुटाना और उसकी पुष्टि करना मुश्किल हो गया।


सटीक आंकड़ों की चुनौती

सटीक आंकड़ों की चुनौती और चेतावनी
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब किसी देश में जानबूझकर सूचना तक पहुंच सीमित की जाती है, तो वास्तविक नुकसान का आकलन करने में समय लगता है। अधूरे या जल्दबाजी में जारी किए गए आंकड़े घटनाओं के पैमाने को कम करके दिखा सकते हैं।


अलग-अलग शहरों से जुटाए गए सबूत

अलग-अलग शहरों से जुटाए गए सबूत
रिपोर्ट तैयार करने के दौरान मशहद, करमानशाह और इस्फ़हान जैसे शहरों से मिली जानकारियों को शामिल किया गया। इसके अलावा पीड़ित परिवारों और स्वास्थ्यकर्मियों की गवाही को भी जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया।


ऐतिहासिक रूप से अभूतपूर्व हिंसा का दावा

ऐतिहासिक रूप से अभूतपूर्व हिंसा का दावा
ईरान इंटरनेशनल ने निष्कर्ष निकाला कि जिस पैमाने पर, जिस तीव्रता से और इतने कम समय में मौतें हुईं, वह ईरान के समकालीन इतिहास में पहले कभी नहीं देखा गया।


सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता

“सच्चाई को दबाया नहीं जा सकता”
रिपोर्ट के अंत में वेबसाइट ने कहा कि ईरान के लोगों को दुनिया से काटकर इस तरह की घटनाओं को हमेशा के लिए छिपाया नहीं जा सकता। समय के साथ सच्चाई सामने आएगी और मारे गए लोगों के नाम इतिहास में दर्ज होंगे।