ईरानी महिला फुटबॉल टीम की सुरक्षा पर ट्रंप की चिंता: क्या ऑस्ट्रेलिया देगा शरण?
नई दिल्ली में बढ़ता मानवीय संकट
नई दिल्ली : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय मानवीय संकट उत्पन्न हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में एक महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में भाग ले रही ईरानी महिला फुटबॉल टीम की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज से भावनात्मक अपील की है कि इन साहसी खिलाड़ियों को ईरान वापस न भेजा जाए। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ऑस्ट्रेलिया उन्हें शरण नहीं देता है, तो अमेरिका उनकी सुरक्षा के लिए खड़ा रहेगा।
राष्ट्रगान का बहिष्कार और विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 2 मार्च को दक्षिण कोरिया के खिलाफ मैच के दौरान ईरानी खिलाड़ियों ने अपने राष्ट्रगान को गाने से मना कर दिया। जब मैदान पर धुन बजी, सभी खिलाड़ी चुप खड़े रहे। यह घटना उस समय हुई जब ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की मौत की खबरें आईं। इस कदम को ईरान के सरकारी मीडिया ने 'युद्धकालीन गद्दारी' करार दिया है, जिससे इन महिला खिलाड़ियों की जान को खतरा हो गया है।
ट्रंप की अपील
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर सीधे प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज को संबोधित करते हुए एक कड़ा संदेश लिखा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को तेहरान वापस भेजना एक भयानक मानवीय गलती होगी। ट्रंप का मानना है कि ईरान का इस्लामिक शासन इन महिलाओं को गद्दारी के आरोप में मौत की सजा दे सकता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मिस्टर प्रधानमंत्री, इन्हें शरण दीजिए। अगर आप ऐसा नहीं करेंगे, तो अमेरिका उन्हें पनाह देने और उनकी रक्षा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।"
ऑस्ट्रेलियाई सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग
ईरानी महिला टीम की सुरक्षा को लेकर ट्रंप ही नहीं, बल्कि विश्वभर के मानवाधिकार संगठन और आम जनता भी चिंतित हैं। लगभग 66,000 से अधिक लोगों ने एक ऑनलाइन याचिका पर हस्ताक्षर कर ऑस्ट्रेलियाई सरकार से मानवीय आधार पर त्वरित कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि खिलाड़ियों को वापस जाने के लिए मजबूर करना उन्हें सीधे मौत के मुंह में धकेलने जैसा होगा। वैश्विक मंचों पर भी इन निडर खिलाड़ियों के साहस की चर्चा हो रही है।
ईरानी टीम का टूर्नामेंट से बाहर होना
रविवार को फिलीपींस के खिलाफ 2-0 की हार के बाद ईरानी टीम आधिकारिक रूप से प्रतियोगिता से बाहर हो गई है। नियमों के अनुसार, अब उन्हें ईरान लौटना होगा। टूर्नामेंट के अंतिम मैच के दौरान माहौल तनावपूर्ण रहा, जहाँ कुछ प्रशंसकों ने पेहलवी वंश के पुराने झंडे लहराए और राष्ट्रगान के दौरान हूटिंग की। इन अप्रत्याशित घटनाओं ने खिलाड़ियों की स्थिति को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। टीम के पास अब समय बहुत कम बचा है और कूटनीतिक निर्णय का इंतजार है।
ईरान सरकार का कड़ा रुख
ईरान की सरकारी मीडिया और कट्टरपंथियों ने इन खिलाड़ियों के खिलाफ पहले ही मोर्चा खोल दिया है। उन्हें 'गद्दार' करार दिया गया है और उनके इस कदम को अपमान की चरम सीमा बताया गया है। खामेनेई की मौत के बाद ईरान में राजनीतिक माहौल काफी सख्त हो गया है। ऐसे में इन महिला फुटबॉलरों के लिए घर वापसी किसी भयावह अंत की शुरुआत हो सकती है। पूरी दुनिया अब ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के अगले बड़े कूटनीतिक कदमों को ध्यान से देख रही है ताकि उनकी जान बचाई जा सके।
