उत्तर कोरिया में चुनाव: किम जोंग उन ने कोयला खदान में डाला वोट
उत्तर कोरिया में चुनावी प्रक्रिया का आयोजन
उत्तर कोरिया में 15 मार्च को देश की प्रमुख विधायी संस्था के लिए चुनाव आयोजित किए गए। इस मतदान में किम जोंग उन, जो देश के सर्वोच्च नेता हैं, ने भी भाग लिया। सरकारी मीडिया ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें वे एक कोयला खदान के मतदान केंद्र पर वोट डालते हुए नजर आ रहे हैं।
मतदाता भागीदारी का आंकड़ा
चुनाव आयोग के अनुसार, इस बार लगभग 99.1 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया। ये चुनाव हर पांच साल में होते हैं, और जिन प्रतिनिधियों का चयन किया जाता है, वे सर्वोच्च जन सभा का हिस्सा बनते हैं। यह सभा देश में कानून बनाने और सरकारी नीतियों को मंजूरी देने का कार्य करती है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस सदन में वास्तविक विपक्ष की कोई भूमिका नहीं होती और अधिकांश निर्णय सरकार के अनुरूप ही होते हैं.
राजनीतिक प्रणाली और चुनावी प्रक्रिया
North Korea holds elections for the Supreme People's Assembly, with state media showing Kim Jong Un voting at a coal mine while promoting the coal industry's role in economic plans https://t.co/V7ZXSjxoEF pic.twitter.com/P9vqIDuALR
— Reuters (@Reuters) March 16, 2026
उत्तर कोरिया की राजनीतिक व्यवस्था एक केंद्रीकृत साम्यवादी प्रणाली पर आधारित है, जिसमें किम जोंग उन का नेतृत्व है। वे न केवल सरकार के प्रमुख हैं, बल्कि सेना के सर्वोच्च कमांडर भी हैं। महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों पर अंतिम अधिकार उनके पास होता है।
सुप्रीम पीपुल्स असेंबली में कुल 687 सीटें हैं। चुनाव होते हैं, लेकिन आमतौर पर कोरिया की श्रमिक पार्टी और उसके सहयोगी दल ही उम्मीदवारों को मैदान में उतारते हैं। अधिकांश सीटों पर केवल एक ही उम्मीदवार होता है, जिसके समर्थन में मतदाताओं से वोट डालने की अपेक्षा की जाती है।
मतदान का अधिकार और प्रक्रिया
उत्तर कोरिया के संविधान के अनुसार, 17 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को मतदान का अधिकार है। सिद्धांत में कोई भी व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है और वोट दे सकता है, लेकिन वास्तविकता में चुनावी प्रक्रिया काफी नियंत्रित होती है। मतदान बैलेट पेपर के माध्यम से किया जाता है, जिसमें उम्मीदवार के नाम के सामने समर्थन का निशान लगाया जाता है। यदि कोई मतदाता किसी उम्मीदवार के खिलाफ वोट देना चाहता है, तो उसे अलग प्रक्रिया के तहत ऐसा करना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया में चुनाव प्रक्रिया केवल प्रतीकात्मक है। विश्लेषकों का कहना है कि इन चुनावों के माध्यम से सरकार स्थानीय स्तर पर लोगों की नाराजगी को सीमित करने और प्रशासनिक व्यवस्था को औपचारिक वैधता प्रदान करने का प्रयास करती है। हालांकि इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जाता है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे वास्तविक प्रतिस्पर्धी चुनाव नहीं माना जाता।
