एलन मस्क की न्यूरालिंक: जन्म से अंधे लोगों के लिए नई रोशनी की उम्मीद
न्यूरालिंक का ब्रेन इम्प्लांट 'ब्लाइंडसाइट'
एलन मस्क की न्यूरोटेक कंपनी न्यूरालिंक जन्म से अंधे व्यक्तियों की दृष्टि को पुनर्स्थापित करने के लिए प्रयासरत है। उनकी नई तकनीक, 'ब्लाइंडसाइट', दृष्टिहीन लोगों को देखने की क्षमता प्रदान करने का दावा करती है। 2026 में इसके पहले मानव परीक्षण की योजना बनाई गई है, जिसने वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय और आम जनता का ध्यान आकर्षित किया है।
ब्लाइंडसाइट की तकनीक
ब्लाइंडसाइट एक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (BCI) आधारित उपकरण है, जिसे विशेष रूप से उन लोगों के लिए विकसित किया गया है जिनकी आंखें या ऑप्टिक नर्व कार्य नहीं कर रही हैं। सितंबर 2024 में, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने इसे 'ब्रेकथ्रू डिवाइस' का दर्जा दिया, जो गंभीर बीमारियों के उपचार में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
एलन मस्क के अनुसार, यह उपकरण सीधे दिमाग के उस क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा जो दृष्टि से संबंधित है, जिसे विजुअल कॉर्टेक्स कहा जाता है। इससे आंखों और ऑप्टिक नर्व को पूरी तरह से बायपास किया जा सकेगा.
कैसे कार्य करेगा ब्रेन इम्प्लांट?
Neuralink will start high-volume production of brain-computer interface devices and move to a streamlined, almost entirely automated surgical procedure in 2026.
— Elon Musk (@elonmusk) December 31, 2025
Device threads will go through the dura, without the need to remove it. This is a big deal. https://t.co/nfNmtFHKsp
ब्लाइंडसाइट में एक कैमरा शामिल होगा, जो आसपास की छवियों को कैप्चर करेगा। यह जानकारी वायरलेस तरीके से एक कंप्यूटर या प्रोसेसर तक पहुंचेगी, जहां इसे विद्युत संकेतों में परिवर्तित किया जाएगा। ये संकेत फिर दिमाग में लगे इम्प्लांट तक पहुंचेंगे, जहां अत्यंत पतले इलेक्ट्रोड दिमाग को उत्तेजित करेंगे, जैसे सामान्य स्थिति में आंखों से आने वाले संकेत करते हैं।
दिमाग इन संकेतों को छवियों में बदलने का प्रयास करेगा। प्रारंभिक अनुभव स्पष्ट नहीं होंगे, और मस्क ने कहा है कि यह पुराने वीडियो गेम के समान हो सकता है, लेकिन भविष्य में तकनीक में सुधार की संभावना है।
क्या जन्म से अंधे लोग देख सकेंगे?
मस्क का दावा है कि यदि किसी व्यक्ति का विजुअल कॉर्टेक्स सुरक्षित है, तो वह जन्म से अंधा होने के बावजूद देखने का अनुभव कर सकता है। हालांकि, न्यूरोसाइंस के विशेषज्ञों का मानना है कि जन्मजात अंधे व्यक्तियों में यह हिस्सा पूरी तरह विकसित नहीं होता, जिससे उनके लिए स्पष्ट दृष्टि प्राप्त करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ब्लाइंडसाइट जैसे ब्रेन इम्प्लांट के साथ कई जोखिम भी जुड़े हैं, जैसे सर्जरी के दौरान संक्रमण, न्यूरॉन्स को नुकसान, या इम्प्लांट का खराब होना। इसके अलावा, दिमाग से जुड़े डेटा की सुरक्षा, निजता और इस तकनीक की समान पहुंच जैसे नैतिक मुद्दे भी उठते हैं।
