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ऑस्ट्रेलिया में लौह अयस्क के नए भंडार की खोज से वैज्ञानिकों में हलचल

ऑस्ट्रेलिया के हैमर्सले बेसिन में हाल ही में लौह अयस्क के विशाल भंडार की खोज की गई है, जिसने वैज्ञानिकों को नई जानकारी प्रदान की है। यह अध्ययन भंडार की उम्र को 1.4 से 1.1 अरब साल पहले का बताता है, जबकि पहले इसे 2.2 से 2.0 अरब साल पुराना माना जाता था। इस खोज का महत्व केवल आर्थिक आंकड़ों में नहीं, बल्कि भूवैज्ञानिक समझ में भी है। जानें इस खोज के पीछे के शोध और इसके वैश्विक खनिज बाजार पर प्रभाव के बारे में।
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ऑस्ट्रेलिया में लौह अयस्क के नए भंडार की खोज से वैज्ञानिकों में हलचल

ऑस्ट्रेलिया में लौह अयस्क की नई खोज


नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया, जो खनिज संसाधनों के लिए जाना जाता है, के बारे में वैज्ञानिकों ने एक नई और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में स्थित हैमर्सले बेसिन में जमीन के नीचे विशाल लौह अयस्क भंडार के संकेत मिले हैं। हालिया भूवैज्ञानिक अध्ययन ने इन भंडारों की उम्र और उत्पत्ति के बारे में पहले की धारणाओं को पूरी तरह से बदल दिया है। यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक खनिज समझ को भी नया दिशा देती है।


भंडार की उम्र और मात्रा

हैमर्सले बेसिन को पहले से ही लौह अयस्क का एक बड़ा क्षेत्र माना जाता था, लेकिन नई रिसर्च ने इसके इतिहास को नए सिरे से परिभाषित किया है। नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यहां के लौह अयस्क भंडार 1.4 से 1.1 अरब साल पहले बने हैं। पहले वैज्ञानिकों का मानना था कि ये अयस्क 2.2 से 2.0 अरब साल पुराने हैं। नई डेटिंग तकनीकों ने इस धारणा को पलट दिया है।


55 अरब मीट्रिक टन का खजाना


रिसर्च के अनुसार, हैमर्सले बेसिन में लगभग 55 अरब मीट्रिक टन लौह अयस्क मौजूद है। मौजूदा वैश्विक बाजार कीमतों के अनुसार, इसका कुल मूल्य लगभग 5.7 ट्रिलियन डॉलर से अधिक आंका गया है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज का महत्व आर्थिक आंकड़ों से अधिक भूवैज्ञानिक समझ में है। यह अध्ययन पृथ्वी के प्राचीन वातावरण और खनिज बनने की प्रक्रिया को समझने में मदद करता है।


ऑस्ट्रेलिया की खनिज शक्ति

ऑस्ट्रेलिया की वैश्विक स्थिति और मजबूत


ऑस्ट्रेलिया पहले से ही दुनिया का सबसे बड़ा लौह अयस्क निर्यातक है। जियोसाइंस ऑस्ट्रेलिया के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में वैश्विक लौह अयस्क निर्यात का 35 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अकेले ऑस्ट्रेलिया ने प्रदान किया। इस प्रकार, हैमर्सले बेसिन से जुड़ी यह नई जानकारी देश की खनिज ताकत को और मजबूत करती है और आने वाले वर्षों में इसकी रणनीतिक भूमिका को और बढ़ा सकती है।


शोध में सहयोग

रिसर्च संस्थानों की अहम भूमिका


इस अध्ययन में कर्टिन यूनिवर्सिटी समेत कई प्रमुख संस्थानों ने भाग लिया। कर्टिन यूनिवर्सिटी ने अपनी प्रेस रिलीज में बताया कि यह खोज भविष्य की मिनरल एक्सप्लोरेशन रणनीतियों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकती है। इससे वैज्ञानिकों को दुनिया के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के छिपे हुए खनिज भंडार खोजने में मदद मिल सकती है।


किसने किया रिसर्च को फंड


इस महत्वपूर्ण अध्ययन को कई सरकारी और निजी संस्थानों का सहयोग मिला। फंडिंग करने वालों में ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल, बीएचपी, रियो टिंटो, फोर्टेस्क्यू मेटल्स ग्रुप और मिनरल्स रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की साझेदारी भविष्य में खनिज विज्ञान को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है और धरती के भीतर छिपे रहस्यों से और पर्दा उठा सकती है।