कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा: रिश्तों में सुधार की नई उम्मीदें
कनाडा-भारत संबंधों में सुधार के संकेत
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा से पहले, दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। ओटावा का कूटनीतिक दृष्टिकोण अब भारत के साथ व्यापार और आर्थिक सहयोग को प्राथमिकता देने की ओर बढ़ रहा है।
कनाडाई अधिकारियों की टिप्पणियाँ
पिछले कुछ वर्षों में तनाव और आरोपों के कारण दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गई थी, लेकिन अब सुधार की दिशा में प्रयास तेज हो गए हैं। कनाडाई अधिकारियों का कहना है कि भारत के साथ रचनात्मक संवाद जारी है और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए सकारात्मक माहौल तैयार किया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत के साथ संवेदनशील मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि कनाडा ने अपनी लोकतांत्रिक प्रणाली की सुरक्षा के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया है, जिससे बाहरी हस्तक्षेप को रोका जा सके।
भारत के प्रति कनाडा का दृष्टिकोण
रिपोर्टों के अनुसार, कनाडा सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि उन्हें भारत से किसी प्रकार के हस्तक्षेप का ठोस प्रमाण मिलता, तो प्रधानमंत्री की यात्रा संभव नहीं होती। अधिकारियों ने बताया कि दोनों देशों के बीच नियमित संवाद हुआ है, जिससे आगे की बातचीत के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है।
एक अन्य कनाडाई अधिकारी ने कहा कि कनाडा अपने आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को गंभीरता से लेता है और इसे स्वीकार नहीं करता। उन्होंने यह भी कहा कि कनाडा में होने वाले हिंसक अपराधों को भारत से जोड़कर देखना उचित नहीं है। यह बयान उस समय आया है जब प्रधानमंत्री कार्नी भारत के दौरे पर हैं, जिसे दोनों देशों के संबंधों में सुधार का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत का कनाडा के साथ व्यापारिक संबंध
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंध पहले से ही मजबूत हैं। वर्तमान में, भारत कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का वार्षिक व्यापार 21 अरब डॉलर से अधिक है, जो आर्थिक सहयोग की गहराई को दर्शाता है।
कार्नी की यह यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र के व्यापक दौरे का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करना, नए निवेश के अवसर खोजना और पिछले विवादों के बाद संबंधों को नई दिशा देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत और कनाडा के बीच आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को एक नए स्तर पर ले जा सकता है।
