कुद्स डे: फिलिस्तीन के समर्थन में वैश्विक एकजुटता का प्रतीक
कुद्स डे का महत्व
नई दिल्ली: कुद्स डे एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है, जो हर साल रमजान के अंतिम शुक्रवार को मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य फिलिस्तीनी लोगों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करना और इजरायल के कब्जे का विरोध करना है।
'कुद्स' शब्द जेरूसलम का अरबी नाम है, जो मुसलमानों, ईसाइयों और यहूदियों के लिए एक पवित्र स्थल है। यह दिन विश्वभर में फिलिस्तीन की स्वतंत्रता के लिए आवाज उठाने का अवसर प्रदान करता है।
कुद्स डे की स्थापना
कुद्स डे की शुरुआत कैसे हुई?
इस दिवस की स्थापना 1979 में ईरान की इस्लामी क्रांति के दौरान आयतुल्लाह रूहोल्लाह खुमैनी द्वारा की गई थी। उन्होंने रमजान के अंतिम जुमे को 'अंतरराष्ट्रीय कुद्स दिवस' के रूप में मनाने की घोषणा की, ताकि मुसलमान फिलिस्तीन के संघर्ष का समर्थन कर सकें।
यह कार्यक्रम प्रारंभ में ईरान में शुरू हुआ, लेकिन अब यह भारत, पाकिस्तान, इराक और अन्य देशों में भी फैल चुका है। यहां लोग रैलियों का आयोजन कर फिलिस्तीन के अधिकारों की बात करते हैं।
ईरान में कुद्स डे पर रैली
ईरान में रैली पर इजरायल का हमला
इस वर्ष भी कुद्स डे पर तेहरान में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया, जहां लोग 'अमेरिका मुर्दाबाद' और 'इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे थे। इस रैली में ईरान के मंत्री अली लारीजानी भी शामिल हुए। इसी दौरान इजरायल ने कथित तौर पर हमला किया। ईरानी मीडिया के अनुसार, इस घटना में एक महिला की मौत हो गई, हालांकि कुछ रिपोर्टों में किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है।
लारीजानी ने हमले की निंदा करते हुए कहा कि इजरायल की ये हरकतें उसकी मजबूरी को दर्शाती हैं, लेकिन ईरानी लोग कभी पीछे नहीं हटेंगे। पिछले वर्षों में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं, जैसे 1985 में कुद्स डे रैली पर हमले में 78 लोग मारे गए थे।
भारत में कुद्स डे पर प्रदर्शन
भारत में कुद्स डे पर प्रदर्शन
भारत में भी कुद्स डे के अवसर पर कई शहरों में शांतिपूर्ण प्रदर्शन आयोजित किए गए। कश्मीर, लद्दाख, लखनऊ, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और अलीपुर जैसे स्थानों पर मस्जिदों के बाहर लोग एकत्र हुए।
उन्होंने फिलिस्तीन की आजादी की मांग की और मासूमों के साथ खड़े होने के नारे लगाए। इसके साथ ही, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमलों की कड़ी आलोचना की गई। ये प्रदर्शन रमजान के पवित्र महीने में तनाव के बीच एकजुटता का प्रतीक बने।
