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कोलोराडो विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों की जीत: पालक पनीर विवाद में मिली बड़ी सफलता

कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय में दो भारतीय पीएचडी छात्रों ने पालक पनीर गर्म करने पर की गई शिकायत के बाद भेदभाव का मुकदमा जीतकर 2 लाख अमेरिकी डॉलर का समझौता किया। यह मामला सांस्कृतिक पूर्वाग्रह से जुड़ा था और छात्रों ने विश्वविद्यालय पर आरोप लगाया कि उन्होंने उन्हें निशाना बनाया। दो साल की कानूनी लड़ाई के बाद, छात्रों को उनकी डिग्री भी प्रदान की गई। इस घटना ने सोशल मीडिया पर भी चर्चा पैदा की, जहां यूजर्स ने उनकी हिम्मत की सराहना की। जानें इस दिलचस्प कहानी के बारे में और अधिक।
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कोलोराडो विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों की जीत: पालक पनीर विवाद में मिली बड़ी सफलता

कोलोराडो विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों की जीत


नई दिल्ली: अमेरिका के कोलोराडो बोल्डर विश्वविद्यालय में दो भारतीय पीएचडी छात्रों ने एक मामूली घटना को लेकर महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। आदित्य प्रकाश और उर्मी भट्टाचार्य ने पालक पनीर को गर्म करने पर की गई शिकायत के बाद भेदभाव का मुकदमा दायर किया और सितंबर 2025 में 2 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग 1.8 करोड़ रुपये) का समझौता प्राप्त किया। यह मामला सांस्कृतिक पूर्वाग्रह और भारतीय खाने की खुशबू से संबंधित था, जो बाद में एक बड़े विवाद में बदल गया।


छोटी सी बात से शुरू हुआ विवाद

सितंबर 2023 में, आदित्य प्रकाश ने विभाग के माइक्रोवेव में अपना दोपहर का खाना, पालक पनीर, गर्म किया। इसी दौरान एक कर्मचारी ने शिकायत की कि इसकी "तेज गंध" आ रही है और उन्हें माइक्रोवेव का उपयोग न करने के लिए कहा गया। आदित्य ने शांति से उत्तर दिया, "यह तो बस खाना है, मैं इसे गर्म करके जा रहा हूं।" लेकिन यह मामूली बात आगे बढ़ गई और दोनों छात्रों ने विश्वविद्यालय पर भेदभाव का आरोप लगाया।


भेदभाव और प्रतिशोध के आरोप

छात्रों का कहना है कि इस घटना के बाद विश्वविद्यालय ने उन्हें निशाना बनाया। आदित्य को बार-बार सीनियर शिक्षकों के साथ मीटिंग में बुलाया गया और उन पर स्टाफ को "असुरक्षित" महसूस कराने का आरोप लगाया गया। उर्मी भट्टाचार्य का दावा है कि उन्हें बिना किसी कारण के टीचिंग असिस्टेंट की नौकरी से हटा दिया गया। दोनों ने कहा कि विभाग के नियम दक्षिण एशियाई छात्रों को लक्षित करते हैं और उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर भारतीय खाना खोलने से रोकते हैं।


दो साल की कानूनी लड़ाई के बाद समझौता

दो साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद, विश्वविद्यालय ने सितंबर 2025 में समझौता किया। दोनों छात्रों को 1.8 करोड़ रुपये दिए गए और उनकी मास्टर डिग्री प्रदान की गई। हालांकि, उन्हें भविष्य में विश्वविद्यालय में दाखिला या नौकरी से रोक दिया गया। इस महीने दोनों भारत लौट आए।


सोशल मीडिया पर मिली सराहना

उर्मी ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि उन्होंने अपनी त्वचा के रंग, भारतीय लहजे और खाने के अधिकार के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अन्याय के सामने झुकने से इनकार किया। जब यह खबर वायरल हुई, तो सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी हिम्मत की सराहना की। एक यूजर ने लिखा, "पालक पनीर के साथ जश्न मनाऊंगा," जबकि दूसरे ने कहा, "अपनी आवाज उठाने का साहस अद्भुत है।" कई लोगों ने कहा कि भारतीय खाने की खुशबू सुगंध है, गंध नहीं।