क्या USS Gerald R. Ford की तकनीकी समस्याएं अमेरिकी सैन्य रणनीति को कमजोर कर रही हैं?
अमेरिकी युद्धपोत की स्थिति पर चिंता
नई दिल्ली : ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच, अमेरिकी प्रशासन ने अपने सबसे उन्नत विमानवाहक पोत 'यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड' को खाड़ी क्षेत्र में तैनात किया है। हालांकि, जहाज की आंतरिक स्थिति चिंताजनक है। अत्याधुनिक सुविधाओं के बावजूद, इसका संपूर्ण सीवेज सिस्टम पूरी तरह से खराब हो चुका है। चार हजार से अधिक नौसैनिकों के लिए जहाज पर बुनियादी स्वच्छता बनाए रखना अब एक बड़ी चुनौती बन गई है।
लंबी कतारों का सामना
जून 2025 से लगातार समुद्र में तैनात इस युद्धपोत पर लगभग 650 शौचालय हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश अब काम नहीं कर रहे हैं। हजारों नौसैनिकों को अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए रोजाना 45 मिनट तक लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता है। सीवेज सिस्टम की विफलता ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है।
वैक्यूम-आधारित प्रणाली की समस्याएं
इस युद्धपोत की अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद, यह एक नाजुक वैक्यूम-आधारित सीवेज प्रणाली पर निर्भर है। रिपोर्टों के अनुसार, पाइपों में कैल्शियम का जमाव होने के कारण यह बार-बार जाम हो रहा है। एक वॉल्व की खराबी पूरे सिस्टम को ठप कर सकती है। इस समस्या को ठीक करने के लिए हर बार एसिड फ्लश पर लगभग 4 लाख डॉलर खर्च होता है।
टेक्नीशियनों पर बढ़ता दबाव
जहाज की मरम्मत के लिए जिम्मेदार टेक्नीशियन इस समस्या से निपटने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। लगातार मरम्मत के प्रयासों के कारण ये कर्मचारी रोजाना 19 घंटे तक काम करने को मजबूर हैं। इस भारी दबाव के कारण जहाज पर तैनात कर्मियों के बीच अक्सर विवाद देखने को मिलते हैं।
युवाओं में हताशा
यूएसएस जेराल्ड फोर्ड पर तैनात कई सैनिक युवा हैं, जिनकी उम्र 20 से 25 वर्ष के बीच है। घर से दूर रहने के कारण, जहाज पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव उनके मनोबल को तोड़ रहा है। कई नौसैनिकों ने इस मिशन के बाद सेना छोड़ने का विचार किया है।
रणनीतिक तैयारियों पर सवाल
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन समस्याओं का सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन इतिहास कुछ और ही बताता है। पिछले साल रेड सी में संघर्ष के दौरान, एक अन्य विमानवाहक पोत ने अपने कई महत्वपूर्ण फाइटर जेट खो दिए थे। ईरान जैसे दुश्मन के खिलाफ युद्ध की स्थिति में सैनिकों की मानसिक दृढ़ता और जहाज की तकनीकी क्षमता बेहद महत्वपूर्ण होगी।
