क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर होगा होर्मुज जलडमरूमध्य पर?
अमेरिकी राष्ट्रपति का सख्त बयान
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक महत्वपूर्ण और कड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर नियंत्रण को सख्त कर सकता है। ट्रम्प ने कहा कि वाशिंगटन इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में प्रवेश करने या बाहर निकलने वाले जहाजों की नाकाबंदी करने की योजना बना रहा है। यह बयान तब आया है जब दोनों देशों के बीच बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
ईरान पर आरोप
ट्रम्प ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को सुरक्षित रखने के अपने वादों का पालन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ईरान की ओर से समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों का खतरा पहले ही अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को प्रभावित कर चुका है। उनके अनुसार, जब जहाज मालिकों को यह डर होता है कि समुद्र में खदानें हो सकती हैं, तो वे जोखिम लेने से बचते हैं, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
पाकिस्तान में वार्ता
ट्रम्प ने यह भी बताया कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में ईरानी अधिकारियों के साथ लगभग 20 घंटे तक बातचीत हुई। इस वार्ता में कई मुद्दों पर सहमति बनी, लेकिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा और इस मुद्दे पर उनका रुख सख्त बना रहेगा।
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका जलडमरूमध्य में बिछाई गई संभावित बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए कदम उठाएगा और उन जहाजों पर कार्रवाई करेगा जो कथित तौर पर ईरान को "अवैध शुल्क" देते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे जहाजों को सुरक्षित आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी।
ट्रम्प ने ईरान की गतिविधियों को वैश्विक स्तर पर "जबरन वसूली" करार देते हुए कहा कि यदि अमेरिकी सेना या किसी भी वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाया गया, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी हमले का परिणाम गंभीर होगा।
इसके अलावा, ट्रम्प ने संकेत दिया कि इस संभावित नाकाबंदी में अन्य देश भी अमेरिका का समर्थन कर सकते हैं, हालांकि उन्होंने किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य ताकत पहले ही काफी कमजोर हो चुकी है और उसकी नौसेना व वायु रक्षा प्रणाली को काफी हद तक निष्क्रिय कर दिया गया है।
