क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी?
मध्य-पूर्व में तनाव और वैश्विक बाजारों पर प्रभाव
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने मध्य-पूर्व में तनाव को बढ़ा दिया है, जिसका प्रभाव वैश्विक बाजारों पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। इस स्थिति के चलते, दोनों देशों के बीच युद्ध को रोकने के प्रयास वैश्विक स्तर पर तेज हो गए हैं। कई शक्तिशाली देश इस मामले में सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं, और अब भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण बनती जा रही है।
ओमान की मध्यस्थता की भूमिका
सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया शांति घोषणा से पहले ओमान और तुर्की के माध्यम से महत्वपूर्ण गुप्त वार्ताएं हुई थीं। इन वार्ताओं का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करना और बढ़ते संघर्ष को नियंत्रित करना था।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ओमान ने एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने का प्रयास किया है। ओमान का इतिहास इस प्रकार की कूटनीतिक पहलों में सक्रिय रहने का रहा है।
भारत और अन्य देशों की भागीदारी
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि तुर्की और ओमान के अलावा, भारत, सऊदी अरब और मिस्र ने भी कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान किया है। इन देशों ने संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भारत के अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संतुलित संबंध हैं, जिससे नई दिल्ली ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में मदद की है।
कूटनीति का सुरक्षा वाल्व
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इन गुप्त वार्ताओं का ट्रंप के '5-दिवसीय युद्ध विराम के ऐलान' पर कितना प्रभाव पड़ा, लेकिन कूटनीतिक हलकों का मानना है कि इन देशों की सक्रियता ने स्थिति को बिगड़ने से रोका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रयास 'सिक्योरिटी वाल्व' की तरह कार्य कर रहे हैं, जिसने युद्ध को और अधिक फैलने से रोकने में मदद की है।
कूटनीति में तेजी
वर्तमान में, जहां क्षेत्र में सैन्य तनाव बना हुआ है, वहीं कई देश पर्दे के पीछे बातचीत के माध्यम से स्थिति को सामान्य करने का प्रयास कर रहे हैं। युद्ध के चौथे सप्ताह में, कई देशों ने एक साथ आकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच की दूरी को कम करने का प्रयास किया है।
यह संकेत देता है कि निकट भविष्य में कूटनीतिक गतिविधियों में और तेजी आ सकती है।
पाकिस्तान और अन्य देशों के प्रयास
इससे पहले भी खबरें आई थीं कि पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र पर्दे के पीछे रहकर दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस संभावित वार्ता में शामिल हो सकते हैं।
