क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में आ रही है बाधा? जानें ताजा हालात
कूटनीतिक बातचीत में रुकावट
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ता एक बार फिर ठप होती नजर आ रही है। मौजूदा हालात में शांति की उम्मीदें कमजोर होती जा रही हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ईरान के नए प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं है, जिससे इस संकट के शीघ्र समाधान की संभावना कम हो गई है।
ईरान का विवाद समाधान प्रस्ताव
सूत्रों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के उस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं कर रहा है, जिसमें विवाद को चरणबद्ध तरीके से सुलझाने की बात की गई है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को बाद के चरणों में रखने का सुझाव दिया है, जो अमेरिका के लिए अस्वीकार्य है। अमेरिका का स्पष्ट कहना है कि किसी भी समझौते में परमाणु कार्यक्रम को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
ईरान की तीन-स्तरीय योजना
ईरान ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए एक तीन चरणों वाला प्रस्ताव पेश किया है। पहले चरण में अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष समाप्त करने और भविष्य में हमलों की गारंटी देने की बात की गई है। दूसरे चरण में समुद्री रास्तों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को सामान्य करने का प्रस्ताव है। तीसरे चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करने की योजना है।
अमेरिका की सख्त शर्तें
अमेरिकी अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा है कि परमाणु मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण है और इसे पहले ही सुलझाना होगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया कि किसी भी समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके। उन्होंने कहा कि अमेरिका इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं कर सकता और हर समझौते में इसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बातचीत पर प्रभाव
इस मतभेद के कारण दोनों देशों के बीच प्रस्तावित वार्ता भी प्रभावित हुई है। इस्लामाबाद में होने वाली बैठक को रद्द कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों की यात्रा भी रद्द कर दी थी। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल के दिनों में पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया है। इस दौरान उन्होंने व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की, जो ईरान के करीबी सहयोगी माने जाते हैं।
खाड़ी क्षेत्र में तनाव और उसके प्रभाव
इस टकराव का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है, खासकर तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। ब्रेंट क्रूड के दाम बढ़ गए हैं क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या काफी कम हो गई है। पहले जहां सैकड़ों जहाज प्रतिदिन इस रास्ते से गुजरते थे, वहीं अब बहुत कम जहाज ही यहां से निकल पा रहे हैं। कई जहाजों को अमेरिकी रोक के कारण वापस लौटना पड़ा है।
ईरान ने अपने तेल जहाजों को रोके जाने की कार्रवाई को गलत बताते हुए इसे 'समुद्री लूट' करार दिया है। साथ ही, उसने यह संकेत भी दिया है कि यदि अमेरिका नाकेबंदी हटाता है और संघर्ष समाप्त करता है, तो वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ ढीली कर सकता है।
