क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध संभव है? जानें ईरान की सुरक्षा रणनीतियों के बारे में
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर अरब सागर और उसके आस-पास अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में तेजी आई है। इस क्षेत्र में अमेरिका ने एयरक्राफ्ट कैरियर, उन्नत लड़ाकू विमानों, मिसाइलों से लैस युद्धपोतों और THAAD जैसे अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियों को तैनात किया है।
यह तैनाती अमेरिका की लंबी दूरी से हमला करने की क्षमता को दर्शाती है। फिर भी, यह सवाल उठता है कि इतनी सैन्य ताकत होने के बावजूद अमेरिका और उसका सहयोगी इजरायल ईरान पर सीधे जमीनी हमला क्यों नहीं करते।
ईरान की भौगोलिक संरचना
ईरान की भौगोलिक संरचना इसका सबसे बड़ा सुरक्षा कारण है। 2003 में जब अमेरिका ने इराक पर हमला किया था, तब वहां का भूभाग समतल था, जिससे आक्रमण करने वाली सेना को आगे बढ़ने में आसानी हुई थी। लेकिन ईरान की स्थिति अलग है। यह एक ऊंचे पठार पर स्थित है, जिसके चारों ओर ऊंचे और कठिन पर्वत हैं। इन पहाड़ों के कारण बाहरी सेनाओं के लिए ईरान में प्रवेश करना बेहद कठिन हो जाता है।
ईरान के पश्चिमी हिस्से में ज़ागरोस पर्वत श्रृंखला उसकी सुरक्षा की एक मजबूत दीवार है। यह लगभग 1600 किलोमीटर लंबी श्रृंखला इराक सीमा से लेकर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य तक फैली हुई है। इस क्षेत्र में कई ऊंची चोटियां और जटिल पहाड़ी रास्ते हैं, जो सैन्य वाहनों और हथियारों की आवाजाही को कठिन बनाते हैं।
जमीनी सैन्य ढांचा
ईरान ने अपनी रक्षा को मजबूत करने के लिए जमीन के नीचे भी एक व्यापक सैन्य ढांचा तैयार किया है। उसने सुरंगों और भूमिगत ठिकानों का एक नेटवर्क विकसित किया है, जिन्हें 'मिसाइल सिटी' कहा जाता है। इन ठिकानों में मिसाइलों का भंडारण, मरम्मत और लॉन्च की सुविधाएं मौजूद हैं।
ईरान ने पहाड़ों के भीतर भूमिगत एयरबेस भी बनाए हैं, जहां उसके लड़ाकू विमान सुरक्षित रह सकते हैं। इसका उद्देश्य यह है कि यदि सतह पर मौजूद एयरबेस नष्ट हो जाएं, तो भी ईरान जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहे।
मिसाइल तकनीक
ईरान ने मिसाइल तकनीक पर विशेष ध्यान दिया है। उसने ऐसी मिसाइलें विकसित की हैं, जिन्हें जमीन के नीचे छिपाकर रखा जा सकता है और आवश्यकता पड़ने पर अचानक लॉन्च किया जा सकता है। इसके साथ ही, उसने हाई-स्पीड और हाइपरसोनिक मिसाइलों पर भी काम किया है, जिन्हें रोकना बेहद कठिन माना जाता है।
ईरान की सैन्य रणनीति
ईरान की सैन्य रणनीति भी जटिल है। उसकी रक्षा प्रणाली कई स्वतंत्र सैन्य इकाइयों में विभाजित है, ताकि किसी एक केंद्र पर हमले के बाद भी अन्य इकाइयां सक्रिय रह सकें। इसके अलावा, ईरान ने स्वयंसेवी बलों को गुरिल्ला युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया है, जिससे वे दुश्मन सेना को लंबे समय तक उलझाए रख सकें।
ईरान के पास हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य भी एक बड़ा रणनीतिक हथियार है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यदि युद्ध की स्थिति में यह मार्ग बंद हो जाता है, तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
