Newzfatafatlogo

क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता संभव है? जानें रुबियो के बयान का मतलब

अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका या तो एक मजबूत समझौते पर पहुंचेगा या अन्य विकल्पों पर विचार करेगा। इस बीच, पाकिस्तान भी मध्यस्थता की कोशिशों में सक्रिय है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में और क्या हो सकता है आगे।
 | 
क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता संभव है? जानें रुबियो के बयान का मतलब

संभावित समझौते की दिशा में बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियाँ


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर कूटनीतिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि वॉशिंगटन या तो तेहरान के साथ एक मजबूत समझौते पर पहुंचेगा या फिर अन्य विकल्पों पर विचार करेगा। उनके इस बयान को ईरान पर संभावित सैन्य दबाव या हमले की चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।


रुबियो के बयान की मुख्य बातें

रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि बातचीत से जल्द ही सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन फिलहाल किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने में संदेह है। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने एक ठोस प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से खोलने का सुझाव शामिल है।


8 अप्रैल से दोनों देशों के बीच संघर्षविराम जारी है। हाल के दिनों में बातचीत में कुछ प्रगति की खबरें आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों देश 60 दिनों के अस्थायी सीजफायर पर सहमत हो सकते हैं, जिसके तहत ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में सामान्य आवाजाही करेगा, जबकि अमेरिका कुछ आर्थिक पाबंदियों में राहत दे सकता है। इसके साथ ही, ईरान की फ्रीज संपत्तियों को भी जारी करने की संभावना है।


ट्रंप का स्पष्ट संदेश

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जब तक किसी समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर नहीं होते और उसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक अमेरिका की ओर से लागू प्रतिबंध और नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि किसी भी समझौते में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए और दोनों पक्षों को सोच-समझकर निर्णय लेना होगा।


ईरान ने अमेरिका पर भरोसा न होने की बात भी दोहराई है। तेहरान का कहना है कि किसी भी संभावित समझौते में अमेरिकी प्रतिबद्धताओं की गारंटी नहीं है। यही कारण है कि बातचीत के बावजूद दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बना हुआ है और संघर्षविराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।


पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें

इस बीच, पाकिस्तान भी मध्यस्थता की कोशिशों में सक्रिय है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ चीन के दौरे पर हैं, जहां वे क्षेत्रीय हालात पर चर्चा कर रहे हैं। चीन ने भी मध्य पूर्व में शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग का आश्वासन दिया है। पाकिस्तान इससे पहले तेहरान में भी मध्यस्थता से जुड़ी बातचीत कर चुका है और संकेत दिए हैं कि वह आने वाले दिनों में औपचारिक वार्ता की मेज़बानी कर सकता है।