क्या अमेरिका की ईरान नीति में सहयोगियों का साथ नहीं? ट्रंप की अपील पर तुर्की का स्पष्ट इनकार
अमेरिका की ईरान के खिलाफ स्थिति
नई दिल्ली: ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में अमेरिका को सहयोगियों का समर्थन नहीं मिल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए विभिन्न देशों से युद्धपोत भेजने की मांग की है। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन का उल्लेख किया, लेकिन इन देशों ने इस प्रस्ताव पर चुप्पी साध रखी है। तुर्की ने भी स्पष्ट रूप से कहा है कि वह इस युद्ध में शामिल नहीं होगा।
ट्रंप की अपील और प्रतिक्रिया
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का प्रयास किया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कई देश अमेरिका के साथ मिलकर युद्धपोत भेजेंगे ताकि यह जलमार्ग सुरक्षित रहे। हालांकि, यह वही ट्रंप हैं जिन्होंने हाल ही में ब्रिटेन को यह कहकर निराश किया था कि अब उनकी मदद की आवश्यकता नहीं है।
अमेरिकी सेना ने भी होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा का कार्य करने से मना कर दिया है। ट्रंप अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की अपील कर रहे हैं, ताकि भविष्य में यह कह सकें कि उन्होंने सभी को बुलाया था, लेकिन कोई भी नहीं आया।
तुर्की का स्पष्ट इनकार
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान ने रमजान के इफ्तार भोज में कहा कि तुर्की इस संघर्ष में भाग नहीं लेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य देश को इस संकट से बचाना है। एर्दोगान ने कहा कि तुर्की हर खतरे का सामना करने के लिए तैयार है, लेकिन ईरान के संघर्ष में शामिल होने से बचने के लिए सतर्कता बरत रहा है।
हाल ही में ईरान द्वारा दागी गई तीन मिसाइलें तुर्की के हवाई क्षेत्र में आईं, जिन्हें नाटो ने रोक दिया। तुर्की ने ईरान के खिलाफ विरोध दर्ज कराया, लेकिन युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया। एर्दोगान ने इसे 'जाल' करार दिया और कहा कि तुर्की को इस युद्ध में नहीं खींचा जा सकता।
होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे वैश्विक तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यह जलमार्ग विश्व के तेल का एक बड़ा हिस्सा ले जाता है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान के तट पर बमबारी जारी रखेगा, लेकिन कोई बड़ा देश इस संकट में आगे नहीं आ रहा है।
चीन, जो ईरान के साथ अच्छे संबंध रखता है, अमेरिका का समर्थन नहीं करेगा। ब्रिटेन और अन्य देश भी चुप हैं। तुर्की का स्पष्ट इनकार ट्रंप की योजना को और कमजोर कर रहा है।
