क्या अमेरिका के नए प्रतिबंधों से चीन और भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर?
अमेरिका की नई रणनीति: ईरान पर बढ़ता दबाव
अमेरिका ईरान पर अपने दबाव को और अधिक सख्त करने की योजना बना रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि जो देश ईरानी तेल का आयात करेंगे, उनके खिलाफ सेकेंडरी सैंक्शन लगाए जा सकते हैं। इसका अर्थ है कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को भी अमेरिकी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। चीन, जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, इस स्थिति से विशेष रूप से प्रभावित हो सकता है। यदि अमेरिका अपनी चेतावनी को लागू करता है, तो यह चीनी अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने व्हाइट हाउस में कहा कि समुद्री ब्लॉकेड के बाद चीन द्वारा ईरानी तेल की खरीद पर रोक लगाई जा सकती है।
ट्रेजरी सेक्रेटरी का कड़ा बयान
स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसी देश के बैंकिंग सिस्टम में ईरान का धन पाया गया, तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। यह बयान अमेरिका की अधिकतम दबाव नीति को और अधिक आक्रामक बनाने का संकेत देता है।
ईरानी तेल कंपनियों पर नए प्रतिबंध
अमेरिका ने ईरान के तेल परिवहन नेटवर्क पर भी बड़ा हमला किया है। दर्जनों कंपनियों, जहाजों और संबंधित व्यक्तियों पर नए प्रतिबंध लगाए गए हैं, जिससे तेल की आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से बाधित हो सकती है। इससे ईरान की आय पर सीधा असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, पहले के प्रतिबंधों के बावजूद, ईरानी तेल विभिन्न रास्तों से बाजार में पहुंचता रहा है।
समुद्री ब्लॉकेड और छूट की समाप्ति
इस कदम के पीछे हाल ही में लागू किया गया समुद्री ब्लॉकेड मुख्य कारण है। अमेरिका का दावा है कि इस ब्लॉकेड के माध्यम से ईरान की आय पर अंकुश लगाना चाहता है। साथ ही, 30 दिन की जो छूट पहले दी गई थी, जिससे लगभग 140 मिलियन बैरल तेल बाजार में पहुंच सका था, अब उसे आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। इसका मतलब है कि नियम अब और सख्त हो गए हैं।
रूस से तेल खरीदने वालों पर भी प्रभाव
यह कार्रवाई केवल ईरान तक सीमित नहीं है। अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वालों के लिए भी छूट समाप्त कर दी है। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर प्रभाव पड़ना निश्चित है। आपूर्ति में कमी आने से कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।
भारत पर भी संभावित प्रभाव
भारत भी इस स्थिति से प्रभावित हो सकता है। सात साल बाद भारत ने ईरानी ऊर्जा की खरीद शुरू की थी, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
अमेरिका-चीन के बीच टकराव की संभावना
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इससे अमेरिका और चीन के बीच सीधा टकराव बढ़ेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि ईरानी तेल चीन के लिए सस्ता और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसलिए, चीन पूरी तरह से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं दिखता। यदि अमेरिका सख्ती बरतता है और चीन अपनी खरीद जारी रखता है, तो दोनों महाशक्तियों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है।
