क्या अमेरिका ग्रीनलैंड को खरीदने की योजना बना रहा है? ट्रंप का नया प्रस्ताव
ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नजर
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को हासिल करने की पुरानी ख्वाहिश एक बार फिर चर्चा में है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड के निवासियों को सीधे वित्तीय सहायता देकर डेनमार्क से अलग होने के लिए प्रेरित करने की योजना बना रहा है।
क्या है योजना?
ग्रीनलैंड में लगभग 57,000 लोग निवास करते हैं, और यदि प्रत्येक को 1 लाख डॉलर दिए जाएं, तो कुल राशि लगभग 6 अरब डॉलर हो सकती है। यह विचार अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन यह ट्रंप की आक्रामक विदेश नीति का एक हिस्सा प्रतीत होता है।
ट्रंप की ग्रीनलैंड में रुचि
ट्रंप क्यों चाहते हैं ग्रीनलैंड?
ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। यह द्वीप आर्कटिक क्षेत्र में स्थित है, जहां रूस और चीन अपनी गतिविधियों को बढ़ा रहे हैं। ग्रीनलैंड में दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार हैं, जो सैन्य और औद्योगिक उपयोग के लिए आवश्यक हैं। इसके अलावा, बर्फ के पिघलने के कारण यहां नए शिपिंग रूट भी खुल रहे हैं।
ट्रंप का मानना है कि पूर्ण स्वामित्व से अमेरिका को मजबूती मिलेगी, जबकि वर्तमान में केवल सैन्य समझौते हैं जो अमेरिका को वहां बेस स्थापित करने की अनुमति देते हैं। उन्होंने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय कानून उनकी ताकत को नहीं रोक सकता।
नागरिकों को वित्तीय सहायता देने की योजना
नागरिकों को पैसे देने का प्लान
समाचार एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने ग्रीनलैंड के निवासियों को एकमुश्त भुगतान देने पर विचार किया है। यह राशि 10,000 से 1 लाख डॉलर प्रति व्यक्ति तक हो सकती है, जिसका उद्देश्य लोगों को डेनमार्क से अलग होकर अमेरिका के करीब लाना है।
यह विचार वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने की हालिया कार्रवाई के बाद और गंभीर हो गया है। हालांकि, अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और भुगतान की शर्तें भी निर्धारित नहीं की गई हैं। व्हाइट हाउस ने कहा है कि खरीद की संभावनाओं पर विचार चल रहा है।
ग्रीनलैंड और डेनमार्क का विरोध
ग्रीनलैंड और डेनमार्क का विरोध
ग्रीनलैंड एक स्वायत्त क्षेत्र है, लेकिन इसकी रक्षा और विदेश नीति डेनमार्क द्वारा संभाली जाती है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नीलसन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनका द्वीप बिक्री के लिए नहीं है और भविष्य का निर्धारण बाहरी ताकतों द्वारा नहीं किया जा सकता।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, "बहुत हो गया! अब विलय की कल्पना बंद करो।" डेनमार्क और यूरोपीय नेता भी इस पर नाराज हैं। कई नाटो देशों ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि ग्रीनलैंड का मामला केवल वहां के लोगों और डेनमार्क का है।
व्हाइट हाउस का बयान
सभी विकल्प खुले हैं: व्हाइट हाउस
व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया है कि सभी विकल्प खुले हैं, जिसमें सैन्य हस्तक्षेप भी शामिल है। हालांकि, प्रेस सचिव ने कहा कि कूटनीति और सौदा प्राथमिकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने डेनमार्क के साथ बातचीत की योजना का उल्लेख किया है। लेकिन यूरोप में चिंता है कि ट्रंप की धमकियां नाटो को कमजोर कर सकती हैं।
