क्या अमेरिका ग्रीनलैंड पर फिर से कब्जा करने की योजना बना रहा है? ट्रंप का विवादास्पद आदेश
ट्रंप का नया आदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिशों को फिर से तेज कर दिया है। उन्होंने विशेष बलों के कमांडरों को ग्रीनलैंड पर संभावित सैन्य कार्रवाई की योजना बनाने का निर्देश दिया है। हालांकि, अमेरिकी सेना के उच्च अधिकारी इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के सलाहकार इस योजना को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं, जबकि सेना इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ मानती है।
ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नजर
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की इच्छा जताई है। हाल ही में, उन्होंने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) के कमांडरों से सैन्य कार्रवाई की योजना बनाने के लिए कहा। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के राजनीतिक सलाहकार स्टीफन मिलर इस विचार के प्रमुख समर्थक हैं। उनका मानना है कि वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को हटाने की सफलता के बाद ग्रीनलैंड पर भी तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए, इससे पहले कि रूस या चीन वहां अपनी स्थिति मजबूत करें। ट्रंप ने शुक्रवार को फिर से चेतावनी दी कि यदि सौदा नहीं हुआ, तो 'सख्त रास्ता' अपनाना पड़ेगा।
सेना का विरोध
अमेरिकी सेना ट्रंप के इस निर्णय से असहमत है। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और कांग्रेस की मंजूरी के बिना असंभव बताया है। एक सूत्र ने कहा कि सैन्य अधिकारी ट्रंप का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे कि रूस के 'घोस्ट जहाजों' पर ध्यान केंद्रित करना या ईरान के खिलाफ सीमित कार्रवाई करना। सेना का कहना है कि इस तरह की मनमानी नहीं चलेगी, क्योंकि इससे अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचेगा।
राजनीतिक रणनीति
ब्रिटिश राजनयिकों का मानना है कि ट्रंप की यह सोच घरेलू राजनीति से जुड़ी हुई है। अमेरिका में 2026 में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं और अर्थव्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ट्रंप मतदाताओं का ध्यान राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्रित करना चाहते हैं। ग्रीनलैंड के सभी राजनीतिक दलों ने स्पष्ट किया है कि वे न तो अमेरिका के साथ जुड़ना चाहते हैं और न ही डेनमार्क के अधीन रहना। उनका भविष्य उनके अपने हाथ में है।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव
यदि अमेरिका ग्रीनलैंड पर हमला करता है, तो यह डेनमार्क के साथ टकराव का कारण बन सकता है। डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि उसके सैनिक जवाबी कार्रवाई करेंगे। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ विवाद बढ़ सकता है और NATO पर गंभीर संकट आ सकता है। राजनयिक दस्तावेजों में इसे NATO के टूटने का खतरा बताया गया है। यह निर्णय वैश्विक स्थिरता को भी खतरे में डाल सकता है।
