क्या अमेरिका वेनेजुएला पर हमला करने की योजना बना रहा है? जानें पूरी कहानी

अमेरिका की सैन्य गतिविधियाँ वेनेजुएला के खिलाफ
अमेरिका की सैन्य गतिविधियाँ: वेनेजुएला, जो कि दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार का मालिक है, पर अमेरिका की सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के तटों पर युद्धपोत और परमाणु-संचालित फास्ट अटैक पनडुब्बी तैनात कर दी हैं। इस स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका वेनेजुएला में सैन्य हस्तक्षेप की योजना बना रहा है।
मादुरो का जवाब
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका का घुसपैठ 'किसी भी तरह से संभव नहीं' है। उन्होंने अपने सैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि आज उनका देश कल की तुलना में अधिक मजबूत है और वे शांति, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए बेहतर तरीके से तैयार हैं।
अमेरिकी नौसेना की तैनाती
अमेरिकी नौसेना की तैनाती
अमेरिकी नौसेना के प्रमुख एडमिरल डेरिल क्लॉड ने पुष्टि की है कि दक्षिण अमेरिकी तटों पर युद्धपोत तैनात किए गए हैं। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, सात युद्धपोत और एक परमाणु पनडुब्बी पहले से या अगले हफ्ते वहां मौजूद होंगी। इनमें 4,500 से अधिक अमेरिकी सैनिक शामिल हैं, जिनमें लगभग 2,200 मरीन भी हैं।
वेनेजुएला की तैयारियाँ
वेनेजुएला की तैयारियाँ
वेनेजुएला ने अपने तटों पर युद्धपोत और ड्रोन तैनात किए हैं। इसके अलावा, 15,000 सैनिकों को कोलंबिया सीमा पर तैनात किया गया है और हजारों मिलिशिया सदस्यों की भर्ती की जा रही है। मादुरो ने कोलंबिया को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने सीमा पर 25,000 अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं ताकि 'नार्को-आतंकवादी गिरोहों' पर नकेल कसी जा सके।
अमेरिका और मादुरो के बीच संघर्ष
अमेरिका बनाम मादुरो: ड्रग्स या तेल?
अमेरिका ने वेनेजुएला पर कोकेन तस्करी के आरोप लगाए हैं और ट्रंप प्रशासन ने कार्टेल डे लॉस सोल्स को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। मादुरो पर ड्रग्स की तस्करी और सत्ता परिवर्तन का आरोप लगाया गया है, जबकि अमेरिका ने उनकी गिरफ्तारी के लिए 50 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया है।
भू-राजनीतिक महत्व
तेल और भू-राजनीतिक महत्व
वेनेजुएला का तेल भंडार सऊदी अरब, रूस और ईरान से भी बड़ा है। अमेरिकी प्रतिबंधों और आर्थिक संकट के कारण तेल उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे वैश्विक तेल बाजार और भू-राजनीतिक संतुलन पर असर पड़ा है। अमेरिका के इस कदम को ड्रग्स रोकने का बहाना माना जा रहा है, लेकिन रणनीतिक दृष्टि से तेल और क्षेत्रीय प्रभुत्व ही असली उद्देश्य माना जा रहा है।