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क्या अमेरिकी संसद ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका? जानें ईरान युद्ध पर नया प्रस्ताव

अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है जब प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान युद्ध में अमेरिकी सैनिकों को तुरंत वापस बुलाने का प्रस्ताव पारित किया। यह प्रस्ताव 215 के मुकाबले 208 मतों से पास हुआ, जिसमें ट्रंप की अपनी पार्टी के चार सांसदों ने भी विपक्ष का समर्थन किया। डेमोक्रेट्स इसे एक ऐतिहासिक कदम मानते हैं, जबकि ट्रंप प्रशासन ने इसे एक रणनीतिक झटका बताया है। आगे जानें कि यह प्रस्ताव सीनेट में कैसे आगे बढ़ेगा और इसके संभावित परिणाम क्या हो सकते हैं।
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क्या अमेरिकी संसद ने ट्रंप को दिया बड़ा झटका? जानें ईरान युद्ध पर नया प्रस्ताव

अमेरिकी राजनीति में नया मोड़


नई दिल्ली: बुधवार को अमेरिकी राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला। विपक्ष के नियंत्रण वाली प्रतिनिधि सभा ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान युद्ध के चलते अमेरिकी सैनिकों को तुरंत वापस बुलाने का प्रस्ताव पारित किया। यह प्रस्ताव 215 के मुकाबले 208 मतों के छोटे अंतर से पास हुआ।


ट्रंप को मिला बड़ा झटका

ट्रंप को लगा बड़ा झटका


राष्ट्रपति ट्रंप के लिए यह एक बड़ा झटका था, क्योंकि उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी के चार सांसदों ने विपक्षी डेमोक्रेट्स के पक्ष में मतदान किया। इसे ट्रंप के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और नैतिक झटका माना जा रहा है, खासकर आगामी राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए।


डेमोक्रेट्स का आक्रामक रुख

डेमोक्रेट्स का कड़ा रुख 


प्रस्ताव के पारित होने के बाद, डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने कहा कि यह अमेरिकी जनता का व्हाइट हाउस को स्पष्ट संदेश है। यह पहली बार है जब रिपब्लिकन समर्थित सरकार के खिलाफ हाउस ने इतनी मजबूती से कोई प्रस्ताव पास किया है। डेमोक्रेट्स इसे अमेरिकी संसद की संवैधानिक शक्तियों को पुनर्जीवित करने और राष्ट्रपति की एकतरफा सैन्य कार्रवाइयों पर अंकुश लगाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानते हैं।


वॉर पॉवर्स एक्ट का उल्लंघन

वॉर पॉवर्स एक्ट तोड़ने का आरोप


इस विवाद की जड़ अमेरिका के 'वॉर पॉवर्स एक्ट' में है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कांग्रेस को सूचित किए बिना और उसकी अनुमति के बिना इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर सैन्य हमले किए। इस कानून के अनुसार, राष्ट्रपति को किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए 60 दिनों के भीतर कांग्रेस से मंजूरी लेनी होती है, लेकिन यह समय सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि मुख्य लड़ाई खत्म हो गई है, लेकिन वास्तविकता यह है कि दोनों पक्षों के बीच अभी भी संघर्ष जारी है।


सीनेट में प्रस्ताव की संभावनाएं

सीनेट की राह और वीटो की समस्या


प्रतिनिधि सभा से पारित होने के बाद, यह प्रस्ताव अब अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन, सीनेट में जाएगा। सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है, लेकिन संभावना है कि यह प्रस्ताव इसी सप्ताह सीनेट से भी पारित हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप अपनी विशेष शक्तियों का उपयोग करके इस पर 'वीटो' लगा सकते हैं। आगामी नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों को देखते हुए, रिपब्लिकन सांसदों के बीच चिंता बढ़ने लगी है, क्योंकि लंबा युद्ध उनके चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है।