क्या इंडोनेशिया की पाकिस्तान से लड़ाकू विमानों की खरीद भारत के लिए चिंता का विषय है?
भारत-इंडोनेशिया रक्षा सहयोग में नई चुनौतियाँ
नई दिल्ली: भारत और इंडोनेशिया के बीच रक्षा सहयोग एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है, लेकिन इसी बीच एक नई रणनीतिक चुनौती उभरकर सामने आई है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री साफरी समसुद्दीन की हालिया पाकिस्तान यात्रा और वहां पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू से मुलाकात के बाद यह संकेत मिले हैं कि इंडोनेशिया पाकिस्तान से लड़ाकू विमानों की खरीद पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब भारत और इंडोनेशिया लगभग 450 मिलियन डॉलर की ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल डील को अंतिम रूप देने के करीब हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इंडोनेशिया पाकिस्तान-चीन के संयुक्त रूप से विकसित JF-17 'थंडर' मल्टी-रोल फाइटर जेट्स को अपने बेड़े में शामिल करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है।
पाकिस्तान का प्रस्ताव
पाकिस्तान ने इंडोनेशिया को 40 तक JF-17 लड़ाकू विमानों की पेशकश की है। यह फाइटर जेट पाकिस्तान और चीन के सहयोग से विकसित किया गया है। भारत के लिए यह स्थिति संवेदनशील है, क्योंकि नई दिल्ली इंडोनेशिया को दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य आक्रामकता के खिलाफ एक महत्वपूर्ण साझेदार मानता है।
इसलिए, जकार्ता का इस्लामाबाद और बीजिंग से जुड़े रक्षा प्लेटफार्मों के साथ बढ़ता सहयोग भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है।
कॉम्बैट ड्रोन पर भी विचार
भारत की चिंताएं तब और बढ़ गईं जब यह जानकारी मिली कि इंडोनेशिया पाकिस्तान में निर्मित कॉम्बैट ड्रोन खरीदने पर भी विचार कर रहा है। इसी संदर्भ में बांग्लादेश वायुसेना द्वारा भी पाकिस्तान के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने और JF-17 विमानों की संभावित खरीद को लेकर बातचीत की खबरें आई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह सब पाकिस्तान की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह चीन समर्थित हथियार प्रणालियों को क्षेत्र में आक्रामक रूप से आगे बढ़ा रहा है।
ब्रह्मोस की ताकत
भारत की सैन्य रणनीति में ब्रह्मोस मिसाइल की महत्वपूर्ण भूमिका तब स्पष्ट हुई थी, जब पिछले वर्ष मई में भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया था। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय वायुसेना ने Su-30MKI लड़ाकू विमानों से लगभग 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी थीं।
इन हमलों में पाकिस्तान के 12 प्रमुख एयरबेस में से 11 को भारी नुकसान हुआ था। प्रभावित ठिकानों में चकलाला (नूर खान), रफीकी, सरगोधा, जैकोबाबाद, भोलारी और स्कार्दू शामिल थे।
ब्रह्मोस डील बनाम JF-17: भरोसे की परीक्षा
विश्लेषकों का मानना है कि इंडोनेशिया द्वारा पाकिस्तान के JF-17 विमानों पर विचार करना, भारत-इंडोनेशिया के बीच आपसी विश्वास को कमजोर कर सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को और जटिल बना सकता है। यह विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण हो जाता है, जब दोनों देश ब्रह्मोस जैसी संवेदनशील डील के बेहद करीब हों।
पिछले नवंबर में हुई तीसरी भारत-इंडोनेशिया रक्षा मंत्रियों की बैठक में, भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री के बीच ब्रह्मोस डील को लेकर महत्वपूर्ण प्रगति हुई थी।
इंडोनेशिया की समुद्री सुरक्षा
ब्रह्मोस डील पर चर्चा उस समय भी हुई थी, जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो वर्ष 2025 के गणतंत्र दिवस पर भारत के मुख्य अतिथि के रूप में नई दिल्ली आए थे। इंडोनेशिया की ब्रह्मोस में रुचि उसकी समुद्री सुरक्षा जरूरतों से जुड़ी है, खासकर नातुना सागर क्षेत्र में बढ़ते दबाव के कारण।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रह्मोस की तैनाती से इंडोनेशिया की समुद्री प्रतिरोधक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और उसकी सैन्य आधुनिकीकरण योजनाओं को मजबूती मिलेगी।
